Odisha School Books : ओडिशा में स्कूली किताबों में 1760 गलतियां, सरकार ने वापस लेने से किया इनकार

Odisha School Books : ओडिशा में स्कूली पाठ्यपुस्तकों में गंभीर त्रुटियों का मामला इन दिनों तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को राज्य सरकार ने एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लेते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि स्कूली छात्रों में बांटी जा चुकी त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों को वापस नहीं लिया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि चूंकि ये किताबें पहले ही राज्य भर के लाखों छात्रों तक पहुंच चुकी हैं, इसलिए इन्हें वापस लेना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। सरकार की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि कक्षा में शिक्षण के दौरान शिक्षक स्वयं इन गलतियों को चिन्हित करेंगे और छात्रों को उन्हें सुधारने में मदद करेंगे। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से ही नई और संशोधित पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।

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एससीईआरटी की सफाई और शिक्षण प्रक्रिया में बदलाव

राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की निदेशक मधुस्मिता साहू ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि कक्षा 1 से 8वीं तक की किताबों में गलतियां मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किताबों की वापसी का कोई विकल्प नहीं है। साहू ने शिक्षण पद्धति में एक विशेष प्रक्रिया अपनाने का सुझाव दिया है: जहां छोटी कक्षाओं के छात्र शिक्षकों की सहायता से गलतियों में सुधार करेंगे, वहीं बड़ी कक्षाओं (उच्च प्राथमिक स्तर) के छात्रों को इस प्रक्रिया में शामिल करके उन्हें खुद गलतियां पहचानने और उन्हें ठीक करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विभाग ने यह भी दावा किया है कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।

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विपक्ष का हमला: 1,760 गलतियां और छात्रों के भविष्य पर संकट

इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। बीजद के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने आरोप लगाया है कि पहली से आठवीं कक्षा तक की किताबों में कुल 1,760 गलतियां पाई गई हैं। मोहंती ने चेतावनी दी कि इस तरह की गलतियां छात्रों के मन में भ्रम पैदा कर सकती हैं और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव डालेंगी। विपक्ष का कहना है कि सरकार अपनी गलती स्वीकार कर रही है, लेकिन किताबों को वापस न लेना छात्रों के प्रति उनकी लापरवाही को दर्शाता है। बीजद ने तुरंत प्रभाव से इन त्रुटिपूर्ण किताबों को वापस लेने और छात्रों को सही और प्रमाणित किताबें वितरित करने की पुरजोर मांग की है।

उच्च-स्तरीय समिति का गठन और जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस पूरी गड़बड़ी की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के आदेश के एक दिन बाद ही सरकार ने इस मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन कर दिया है। इस समिति की अध्यक्षता विकास आयुक्त सह अपर मुख्य सचिव देव रंजन कुमार सिंह करेंगे। उनके साथ ओडिया भाषा, साहित्य और संस्कृति विभाग के सचिव विजय केतन उपाध्याय और उप सचिव (सामान्य प्रशासन) स्मिता पाणी को समिति का सदस्य बनाया गया है। सरकार ने इस समिति को सख्त समयसीमा देते हुए कहा है कि वह सात दिनों के भीतर मामले की जांच पूरी करे और अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपे। फिलहाल, पूरे राज्य में यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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Chandan Das

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