Nimisha Priya release : भारतीय नर्स निमिषा प्रिया, जो यमन में एक नागरिक की हत्या के मामले में दोषी करार दी गई हैं, मृत्युदंड से फिलहाल बच गई हैं। 16 जुलाई को उन्हें फांसी दी जानी थी, लेकिन भारत सरकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं की कोशिशों के चलते यह फांसी रोक दी गई। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि वह निमिषा और उसके परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रहा है।
निमिषा की रिहाई के पीछे डॉक्टर के.के. पॉल की भी अहम भूमिका रही है, जिन्होंने दावा किया है कि वह भारत वापस आएंगी और उनकी रिहाई संभव है। हालांकि, यदि यह सच होता है तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत लौटने के बाद निमिषा जेल में रहेंगी या आजाद घूम सकेंगी?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 208 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में अपराध करता है तो उसे ऐसे मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है, जैसा कि उसने वह अपराध भारत में किया हो। हालांकि, इस पर कार्रवाई की अनुमति केंद्र सरकार से लेनी होती है।
इसका मतलब यह है कि यदि भारत सरकार चाहे, तो वह निमिषा के खिलाफ भारत में मुकदमा चला सकती है, और अदालत यह तय करेगी कि उसे सजा दी जाए या नहीं। अगर निमिषा को दोषी पाया जाता है, तो उसे भारत में जेल भेजा जा सकता है।
यमन ने 1989 में अपनाए गए दूसरे प्रोटोकॉल, जो मृत्युदंड के उन्मूलन की बात करता है, पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके विपरीत भारत ने भी मृत्युदंड को पूरी तरह समाप्त नहीं किया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ मामलों तक सीमित कर रखा है।
बचन सिंह बनाम पंजाब (1980) मामले में अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि मृत्युदंड केवल अत्यंत जघन्य अपराधों में ही लागू होगा, जहां सुधार की कोई गुंजाइश न हो।
निमिषा के पक्ष में यह दलील दी गई कि वह यमन में बंधक जैसी स्थिति में थीं, और उनका पासपोर्ट कथित रूप से उनके साथ काम करने वाले नागरिक ने छीन लिया था, जिससे वह यमन से निकल नहीं पाईं। यह मानवीय परिस्थितियाँ उनकी मृत्युदंड की सजा को कम कर सकती हैं और यही कारण रहा कि भारत सरकार ने उनकी सजा रुकवाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए।
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, हर देश को अपने क्षेत्र में अपराधों पर पूर्ण अधिकार होता है, चाहे अपराधी विदेशी ही क्यों न हो। ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए देश प्रत्यर्पण संधियों पर निर्भर करते हैं।
हालांकि भारत और यमन के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, जिससे निमिषा को भारत लाना कानूनी और कूटनीतिक रूप से जटिल मामला बन जाता है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कानूनों के तहत प्रवासियों को यातना और अमानवीय व्यवहार से सुरक्षा प्रदान की जाती है। हालांकि यमन ने इस अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन पर भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे भारत की दलीलें अंतरराष्ट्रीय मंच पर सीमित हो सकती हैं।
अगर निमिषा भारत लौटती हैं, तो केंद्र सरकार को तय करना होगा कि उसके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाए। कानूनन वह मुकदमे का सामना कर सकती हैं, लेकिन कोर्ट यह देखेगी कि क्या यमन की सजा पर्याप्त थी या नहीं।
यह भी संभव है कि भारत में उनका केस यह कहकर बंद कर दिया जाए कि उन्होंने पहले ही यमन में सजा भुगती है। वहीं, सरकार की मंजूरी के बिना कोई भी भारतीय अदालत स्वतः संज्ञान नहीं ले सकती।
निमिषा प्रिया की फांसी रुकना एक बड़ी राहत जरूर है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। अगर वह भारत लौटती हैं, तो उनका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत सरकार क्या रुख अपनाती है और अदालत उनके पूर्व व्यवहार, यमन में मिली सजा और मानवीय परिस्थितियों को किस दृष्टि से देखती है। bजब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं होता, निमिषा की आजादी और जेल के बीच की स्थिति अधर में ही बनी रहेगी।
Read More : Manipur conflict : मणिपुर में कुकी गुटों के बीच खूनी संघर्ष, जंगलों में भीषण गोलीबारी, पांच अलगाववादी ढेर
RB Choudary Death : मनोरंजन जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। 'सुपर…
Bulldozer Celebration Bengal : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद राज्य की…
CSK vs DC IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मौजूदा सीजन में चेन्नई सुपर…
Sankalp Hospital Ambikapur : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई…
Mamata Banerjee Resignation : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक नतीजों ने राज्य की…
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार, 5 मई 2026 को इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के दूसरे…
This website uses cookies.