Nitin Gadkari : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान देश में जाति और भाषा के आधार पर समाज को बांटने की राजनीति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज “पिछड़ापन एक राजनीतिक स्वार्थ बनता जा रहा है” और यह प्रवृत्ति देश के विकास में बाधा बन रही है।

गडकरी ने कहा कि समाज को जाति, भाषा और अन्य आधारों पर बांटने की कोशिशें तेज हो गई हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “हर कोई खुद को पिछड़ा बताने की होड़ में है, जिससे सामाजिक एकता को नुकसान पहुंच रहा है।”

जातिवाद और संप्रदायवाद के आरोपों पर संघ का पक्ष
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा कि संघ पर जातिवाद और संप्रदायवाद के आरोप लगाए जाते रहे हैं, लेकिन सच्चाई इससे अलग है। उन्होंने कहा, “संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती। वहां कोई भेदभाव नहीं होता और न ही छुआछूत के लिए कोई स्थान है।”
गडकरी ने बताया कि उन्होंने स्वयं अपने जीवन में संघ से यह सीखा है कि राष्ट्र सबसे पहले है और समाज की सेवा सर्वोच्च कर्तव्य। उन्होंने कहा कि जातीय और भाषाई राजनीति देश को पीछे ले जाती है, जबकि सामाजिक समरसता ही प्रगति का मार्ग है।
देश की प्रगति के लिए एकजुटता आवश्यक
केंद्रीय मंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे जाति और भाषा के नाम पर होने वाली राजनीति से दूर रहें। उन्होंने कहा, “हम तभी एक मजबूत और विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं, जब हम सब मिलकर काम करें और आपसी भेदभाव भुलाकर एकजुट रहें।”
गडकरी ने युवाओं को भी संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपनी ऊर्जा जाति या भाषा की पहचान में नहीं, बल्कि देश निर्माण में लगानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी नेता या संस्था समाज को तोड़ने की बात करे, उसका विरोध होना चाहिए।
नितिन गडकरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर में सामाजिक आरक्षण और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों पर बहस तेज है। उनके अनुसार, राजनीति में ‘पिछड़ा’ बनने की दौड़ से बाहर निकलकर एक समरस, एकजुट और समर्पित राष्ट्र की ओर बढ़ना ही भारत की सच्ची प्रगति का मार्ग है।










