Nitish Kumar Hijab Row
Nitish Kumar Hijab Row: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक वीडियो को लेकर घमासान मचा हुआ है, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक मुस्लिम युवती के चेहरे से पर्दा हटाते नजर आ रहे हैं। इस घटना ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि अब यह मुद्दा मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों से मिले महत्वपूर्ण इनपुट के बाद नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है।
हिजाब प्रकरण के बाद पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा श्रेणी की समीक्षा की है। सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर बढ़ती नाराजगी और संभावित विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर खुफिया विभाग ने एक अलर्ट जारी किया था। इसके तुरंत बाद, मुख्यमंत्री के सुरक्षा घेरे में अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी गई है। उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों और दौरों के दौरान अब पहले से कहीं अधिक सावधानी बरती जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
इस पूरे विवाद की जड़ बीते सोमवार को पटना में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यहाँ नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र वितरित कर रहे थे। इसी दौरान, जब एक मुस्लिम युवती अपना नियुक्ति पत्र लेने के लिए मंच पर आई, तो नीतीश कुमार ने उसके चेहरे पर ढके हुए हिजाब/नकाब को अपने हाथों से हटा दिया। मुख्यमंत्री की मंशा संभवतः युवती का चेहरा स्पष्ट रूप से देखने की रही होगी, लेकिन इस कृत्य का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हंगामा खड़ा हो गया।
आरजेडी (RJD) समेत बिहार के तमाम विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है। तेजस्वी यादव और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री के इस व्यवहार को ‘शर्मनाक’ और ‘निजता का उल्लंघन’ करार दिया है। विपक्ष का तर्क है कि किसी महिला की मर्जी के बिना उसके पहनावे या हिजाब के साथ इस तरह का व्यवहार करना मुख्यमंत्री जैसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति को शोभा नहीं देता। कई मुस्लिम संगठनों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कदम बताया है।
वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर भी दो धड़े बन गए हैं। एक पक्ष इसे मुख्यमंत्री की सहजता और चेहरे की पहचान सुनिश्चित करने की कोशिश बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे संवेदनहीनता मान रहा है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री का इरादा किसी को अपमानित करना नहीं था, बल्कि वह केवल पारदर्शिता और संवाद के उद्देश्य से ऐसा कर रहे थे। हालांकि, विपक्षी दबाव के चलते सरकार को इस मामले में सफाई देने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बिहार में आगामी चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हो रही है। ऐसे में महिला सुरक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता के मुद्दों पर नीतीश कुमार की छवि को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की योजना बना रहे हैं, वहीं प्रशासन अब इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि इस विवाद के कारण मुख्यमंत्री की सार्वजनिक सभाओं में कोई सुरक्षा चूक न हो। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।
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