Nitish Kumar Rajya Sabha
Nitish Kumar Rajya Sabha: बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। जनता दल (यूनाइटेड) के सर्वोच्च नेता और नौ बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार ने अब राज्य की राजनीति को अलविदा कहकर राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। गुरुवार को नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया, जो उनके दशकों पुराने मुख्यमंत्री कार्यकाल के समापन का औपचारिक संकेत है।
नीतीश कुमार जब अपना नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंचे, तो वहां का दृश्य एनडीए (NDA) की एकजुटता का बड़ा संदेश दे रहा था। इस खास मौके पर देश के गृहमंत्री अमित शाह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित कई कद्दावर नेता मौजूद थे। विपक्षी गलियारों में इस उपस्थिति को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि नीतीश का दिल्ली जाना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि एनडीए की भविष्य की रणनीति का हिस्सा है।
नामांकन दाखिल करने से ठीक पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत और भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने बिहार की जनता को संबोधित करते हुए लिखा कि पिछले दो दशकों से राज्य की जनता ने उन पर जो अटूट विश्वास दिखाया, वही उनकी असली ताकत रही। उन्होंने कहा, “आपके समर्थन के बल पर ही हमने बिहार को विकास और सम्मान के नए आयामों तक पहुँचाया है।” इस पोस्ट को राजनीतिक विश्लेषक नीतीश कुमार के बिहार के प्रति “फेयरवेल नोट” के रूप में देख रहे हैं।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का सीधा अर्थ यह है कि वे अब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार का अगला ‘किंग’ कौन होगा? राज्य की राजनीति में दो संभावनाएं सबसे प्रबल हैं:
भाजपा का मुख्यमंत्री: क्या अब भाजपा राज्य में अपनी बड़ी भूमिका निभाते हुए अपना सीएम चेहरा सामने लाएगी?
JDU कोटे से उत्तराधिकारी: क्या नीतीश अपनी पार्टी के किसी भरोसेमंद चेहरे को अपनी विरासत सौंपेंगे?
इस नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कयासों का बाजार गर्म है, और पटना से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है।
नीतीश कुमार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजद (RJD) और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार बिहार की समस्याओं से मुंह मोड़कर सुरक्षित रास्ता तलाश रहे हैं। विरोधियों का तर्क है कि राज्य में बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को बीच में छोड़कर दिल्ली जाना जनता के साथ विश्वासघात है। हालांकि, जेडीयू समर्थकों का मानना है कि नीतीश कुमार अब केंद्र में रहकर बिहार के हितों की बेहतर पैरवी कर सकेंगे।
नीतीश कुमार का पटना छोड़कर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होना बिहार की राजनीति के एक अध्याय का अंत है। ‘सुशासन बाबू’ के नाम से मशहूर नीतीश ने बिहार की सूरत बदलने में जो भूमिका निभाई, उसे इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। अब देखना यह होगा कि दिल्ली की चौखट पर नीतीश कुमार की नई पारी देश की राजनीति में क्या रंग लाती है और बिहार की सत्ता की कुर्सी पर बैठने वाला नया चेहरा राज्य को किस दिशा में ले जाता है।
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