Nobel Prize 2025: चिकित्सा के क्षेत्र में इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार जापान के प्रसिद्ध इम्यूनोलॉजिस्ट प्रो. शिमोन सकागुची को उनकी क्रांतिकारी खोज के लिए प्रदान किया गया है। उन्होंने T रेगुलेटरी (Regulatory) कोशिकाओं (Tregs) की पहचान की, जो शरीर को ऑटोइम्यून बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।नोबेल समिति के अनुसार, यह खोज इम्यूनोलॉजी और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर्स के इलाज में एक नया अध्याय खोलती है।

“T रेगुलेटरी सेल्स से मिलेगी नई दिशा”
नोबेल पुरस्कार की घोषणा के तुरंत बाद दिए गए एक इंटरव्यू में सकागुची ने कहा: “मुझे विश्वास है कि यह खोज इम्यूनोलॉजिस्ट्स और डॉक्टरों को प्रेरित करेगी कि वे T रेगुलेटरी कोशिकाओं का उपयोग करके विभिन्न इम्यूनोलॉजिकल रोगों का इलाज करें।”Tregs हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली को संतुलित रखने में मदद करती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि शरीर खुद के ऊतकों पर हमला न करे। इनकी अनुपस्थिति या कमजोरी के कारण ही कई बार ऑटोइम्यून रोग जैसे टाइप 1 डायबिटीज, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, रूमेटॉयड अर्थराइटिस जैसी बीमारियाँ होती हैं।

“जब सबने हार मानी, मैंने शोध जारी रखा”
प्रोफेसर सकागुची ने बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ही ये सवाल उठाया था कि “इम्यून सिस्टम कैसे खुद के खिलाफ हमला करने से रुकता है?”उन्होंने बताया:”यह एक बुनियादी वैज्ञानिक प्रश्न था जिसने मुझे वर्षों तक प्रेरित किया। बहुत से शोधकर्ता थक कर छोड़ चुके थे, लेकिन मुझे विश्वास था कि इसका जवाब जरूर मिलेगा।”लगातार प्रयोगों और चुनौतियों के बीच, आखिरकार उन्होंने 1995 में पहली बार इन T रेगुलेटरी कोशिकाओं की पहचान की और उनका महत्व दुनिया के सामने रखा।
नोबेल की खबर ने किया आश्चर्यचकित
नोबेल पुरस्कार मिलने की खबर सुनकर सकागुची बेहद खुश और आश्चर्यचकित थे। उन्होंने कहा:”मैंने कभी पुरस्कार के लिए काम नहीं किया, बल्कि हमेशा यह जानने की कोशिश की कि प्रकृति इतनी समझदारी से कैसे काम करती है। यह सम्मान मेरे जैसे हर वैज्ञानिक के लिए उम्मीद की किरण है।”
चिकित्सा के क्षेत्र में नई क्रांति
विशेषज्ञों का मानना है कि सकागुची की यह खोज भविष्य में कैंसर, ट्रांसप्लांट रिजेक्शन और क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी डिजीजेज़ जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी इलाज के रास्ते खोल सकती है। शिमोन सकागुची की खोज यह सिद्ध करती है कि बुनियादी विज्ञान में धैर्य, निरंतरता और उत्सुकता से कैसे मानवता की भलाई के लिए अद्भुत खोजें की जा सकती हैं। अब दुनिया उम्मीद कर रही है कि T रेगुलेटरी सेल्स पर आधारित चिकित्सा आने वाले वर्षों में लाखों लोगों के जीवन में बदलाव ला सकती है।











