North Korea Missile Test
North Korea Missile Test: उत्तर कोरिया ने शनिवार की सुबह एक बार फिर संदिग्ध बैलिस्टिक प्रोजेक्टाइल दागकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से अपने पड़ोसी देशों और अमेरिका की नींद उड़ा दी है। यह हालिया प्रक्षेपण प्योंगयांग की उस बढ़ती आक्रामकता का हिस्सा है, जिसके तहत देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन खुद सैन्य गतिविधियों की कमान संभाल रहे हैं। अभी कुछ ही दिन पहले किम जोंग उन को एक अत्याधुनिक युद्धपोत से क्रूज मिसाइलों के परीक्षण की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते देखा गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया अपनी मिसाइल तकनीक को लगातार अपग्रेड कर रहा है, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
जापान के कोस्ट गार्ड और रक्षा मंत्रालय ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि उत्तर कोरिया द्वारा दागी गई संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल समुद्र में जा गिरी। जापान के सार्वजनिक प्रसारक एनएचके (NHK) ने रक्षा अधिकारियों के हवाले से जानकारी दी कि यह प्रोजेक्टाइल जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के ठीक बाहर गिरी है। हालांकि इससे किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन जापान सरकार ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। इस घटना के बाद जापान ने अपने निगरानी तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है और भविष्य में होने वाले किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए जहाजों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय में किया गया है जब दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका का वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। 9 मार्च से 19 मार्च तक चलने वाले इस बड़े पैमाने के युद्धाभ्यास ने प्योंगयांग को भड़का दिया है। उत्तर कोरिया ऐतिहासिक रूप से इन अभ्यासों को ‘युद्ध का रिहर्सल’ और अपनी संप्रभुता पर हमला मानता रहा है। किम जोंग उन प्रशासन का दावा है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया की यह सैन्य जुगलबंदी सीधे तौर पर उनके देश को अस्थिर करने की एक सुनियोजित साजिश है, जिसका जवाब वे अपनी परमाणु और बैलिस्टिक क्षमताओं का प्रदर्शन करके दे रहे हैं।
मिसाइल परीक्षणों के इस दौर के पीछे उत्तर कोरिया की एक गहरी कूटनीतिक मंशा भी छिपी है। हाल ही में सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस के दौरान, प्योंगयांग ने वाशिंगटन से स्पष्ट रूप से मांग की है कि उत्तर कोरिया को एक आधिकारिक परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में मान्यता दी जाए। पिछले पांच वर्षों में पहली बार आयोजित इस कांग्रेस में देश की रक्षा नीति और परमाणु हथियारों के भंडार को बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। उत्तर कोरिया का मानना है कि जब तक दुनिया उसे एक परमाणु शक्ति के रूप में स्वीकार नहीं करती, तब तक वह अपनी सैन्य तैयारियों और लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण को नहीं रोकेगा।
उत्तर कोरिया केवल अपने क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक भू-राजनीति में भी सक्रिय रूप से अमेरिका विरोधी रुख अपना रहा है। प्योंगयांग ने हाल ही में ईरान पर किए गए अमेरिकी हमलों की कड़ी शब्दों में आलोचना की है। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की इस कार्रवाई को ‘बेशर्म’ और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान का पक्ष लेकर उत्तर कोरिया उन सभी देशों का एक मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहा है जो अमेरिकी प्रतिबंधों और नीतियों के खिलाफ हैं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि उत्तर कोरिया आने वाले समय में अपनी सैन्य गतिविधियों को और तेज कर सकता है।
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