North Korea Breast Ban: उत्तर कोरिया की सत्ता पर काबिज तानाशाह किम जोंग-उन एक बार फिर अपने अनोखे और कठोर फैसले के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार मामला महिलाओं की ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी (स्तन वृद्धि सर्जरी) से जुड़ा है, जिस पर किम प्रशासन ने पूरे देश में प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला देश में “पूंजीवादी मानसिकता” और “एंटी-सोशलिस्ट” गतिविधियों पर लगाम लगाने के नाम पर लिया गया है।

क्यों लगाया गया ब्रेस्ट सर्जरी पर बैन?
उत्तर कोरिया की सरकारी सोच के अनुसार, स्तन वृद्धि जैसी प्लास्टिक सर्जरी “बुर्जुआ मानसिकता” को दर्शाती है और समाजवाद के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। किम सरकार का मानना है कि इस प्रकार की सर्जरी पूंजीवादी दिखावे को बढ़ावा देती है और समाज में असमानता को जन्म देती है। इसलिए इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

सख्त कानून, भारी जुर्माना
सरकार ने ऐलान किया है कि अगर कोई महिला इस नियम का उल्लंघन करती है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यही नहीं, आईब्रोज़ और आईलिड सर्जरी जैसे कॉस्मेटिक ऑपरेशनों पर भी प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया जारी है।
स्थानीय अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे महिलाओं की शारीरिक बनावट में किसी असामान्य बदलाव पर नजर रखें। यदि किसी महिला में स्तन वृद्धि जैसी कोई सर्जरी की आशंका होती है, तो स्वास्थ्य विभाग की टीम शारीरिक जांच भी कर सकती है।
सार्वजनिक सुनवाई में अपमान
सितंबर महीने में उत्तर कोरिया के सैरियन शहर के एक सांस्कृतिक केंद्र में एक डॉक्टर और दो महिलाओं के खिलाफ सार्वजनिक सुनवाई की गई थी। आरोप था कि डॉक्टर ने अवैध रूप से ब्रेस्ट सर्जरी की थी और महिलाओं ने उसे करवाया। इस सुनवाई में महिलाओं को काफी बेइज्जती झेलनी पड़ी और उन्हें “पूंजीवादी मानसिकता वाली” बताया गया।
महिला डॉक्टर और मरीजों पर बढ़ी सख्ती
इस घटना के बाद से किम प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। देशभर में गश्ती दल सक्रिय किए गए हैं जो ऐसी सर्जरी करवाने वाली महिलाओं की पहचान कर रहे हैं। जिन पर शक होता है, उन्हें सीधे पूछताछ और जांच के लिए बुलाया जाता है।
किम जोंग-उन के इस ताजा फैसले से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि उत्तर कोरिया में व्यक्तिगत आजादी का कोई स्थान नहीं है। स्तन वृद्धि जैसी सर्जरी, जो दुनियाभर में एक सामान्य व्यक्तिगत पसंद मानी जाती है, उसे यहां राजनीतिक अपराध की तरह देखा जा रहा है। यह फैसला महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता और अधिकारों पर सीधा हमला है।










