Kim Jong Un
Kim Jong Un: उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने अपने हालिया बयानों से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। प्योंगयांग में आयोजित सात दिवसीय ‘वर्कर्स पार्टी कांग्रेस’ के समापन पर किम ने स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया अब उनके लिए कोई पड़ोसी देश नहीं, बल्कि एक ‘स्थायी दुश्मन’ है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि उत्तर कोरिया की संप्रभुता या सुरक्षा पर जरा भी आंच आई, तो वे दक्षिण कोरिया को ‘पूरी तरह नष्ट’ करने में संकोच नहीं करेंगे। किम का यह बयान दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों में और कड़वाहट पैदा करने वाला है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वर्तमान परिस्थितियों में सियोल के साथ बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
पार्टी कांग्रेस के दौरान किम जोंग-उन ने अगले पांच वर्षों के लिए उत्तर कोरिया की सैन्य और रणनीतिक शक्ति को बढ़ाने का एक महत्वाकांक्षी खाका पेश किया। इस योजना का मुख्य केंद्र परमाणु हथियारों और मिसाइल तकनीक का अभूतपूर्व विस्तार है। किम ने घोषणा की कि उत्तर कोरिया अपनी रक्षा क्षमताओं को उस स्तर पर ले जाएगा जहाँ कोई भी दुश्मन देश उन पर हमला करने की सोच भी न सके। इस रणनीतिक योजना का उद्देश्य उत्तर कोरिया को एक ऐसी अजेय परमाणु शक्ति बनाना है, जो वैश्विक मंच पर अपनी शर्तों पर बात कर सके।
किम जोंग-उन ने भविष्य के जिन हथियारों की सूची पेश की है, वह विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने निम्नलिखित अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने का संकल्प लिया:
परमाणु-संचालित पनडुब्बी: जो लंबे समय तक पानी के भीतर रहकर हमला करने में सक्षम हो।
SLBM (Submarine-Launched Ballistic Missiles): पानी के भीतर से दागी जाने वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें।
AI-युक्त ड्रोन: आधुनिक युद्ध के अनुकूल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस मानवरहित विमान।
उन्नत उपग्रह: जासूसी और निगरानी के लिए बेहतर सैटेलाइट सिस्टम।
सामरिक परमाणु हथियार: युद्ध के मैदान में छोटे स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले परमाणु हथियार।
जहाँ एक ओर दक्षिण कोरिया के लिए किम का रवैया बेहद सख्त रहा, वहीं अमेरिका के प्रति उन्होंने थोड़ा कूटनीतिक रुख अपनाया। किम ने संकेत दिया कि यदि वाशिंगटन अपनी ‘शत्रुतापूर्ण नीति’ और आर्थिक प्रतिबंधों के दबाव को छोड़ देता है, तो बातचीत के दरवाजे खोले जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग-उन अपनी सैन्य शक्ति दिखाकर अमेरिका पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में उनका पलड़ा भारी रहे। वे एक साथ ‘धमकी और संवाद’ की दोहरी नीति पर चल रहे हैं।
कांग्रेस के समापन के बाद प्योंगयांग की सड़कों पर एक विशाल सैन्य परेड आयोजित की गई। इस परेड की सबसे खास बात किम जोंग-उन की अपनी बेटी के साथ मौजूदगी रही, जिसे दुनिया भविष्य के उत्तराधिकारी के संकेत के रूप में देख रही है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह रही कि इस बार परेड में अमेरिका तक मार करने वाली विशालकाय ICBM मिसाइलों का प्रदर्शन नहीं किया गया। विश्लेषकों का मानना है कि यह अमेरिका को पूरी तरह उकसाने से बचने की एक सोची-समझी कूटनीति हो सकती है, ताकि बातचीत का विकल्प बना रहे।
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