Kotia Dispute News : ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच कोटिया क्षेत्र को लेकर पुराना सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ओडिशा सरकार ने विवादित क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने संबंधी अधिसूचना जारी करने के मामले में आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की है। ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार, यह याचिका कोरापुट के जिलाधिकारी के माध्यम से दाखिल की गई। विवाद का केंद्र कोटिया ग्राम पंचायत क्षेत्र है, जहां दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से प्रशासनिक अधिकारों को लेकर मतभेद बना हुआ है।
10 अक्टूबर की अधिसूचना से बढ़ा विवाद
मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने 10 अक्टूबर को कोटिया ग्राम पंचायत क्षेत्र में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव कराने से संबंधित अधिसूचना जारी की थी। ओडिशा सरकार का आरोप है कि यह कदम उच्चतम न्यायालय के पुराने आदेश के विपरीत है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने न्यायालय में अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। ओडिशा का कहना है कि विवादित क्षेत्र में किसी भी तरह की चुनावी गतिविधि से पहले न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।
क्या है कोटिया के 28 गांवों का सीमा विवाद?
कोटिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत 28 गांव आते हैं, जिन्हें ओडिशा अपना क्षेत्र मानता है। वहीं, आंध्र प्रदेश इनमें से 21 गांवों पर अपना दावा जताता रहा है। इस क्षेत्र को लेकर दोनों राज्यों के बीच कई वर्षों से विवाद जारी है। ओडिशा सरकार ने 1968 में इस मामले को उच्चतम न्यायालय के समक्ष उठाया था। बाद में 2006 में शीर्ष अदालत ने दोनों राज्यों को विवादित क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। ओडिशा का तर्क है कि इस आदेश का सम्मान करते हुए क्षेत्र में किसी भी एकतरफा प्रशासनिक कदम से बचना जरूरी है।
अवमानना याचिका में अधिकारियों को भी बनाया पक्षकार
ओडिशा सरकार ने अपनी याचिका में केवल आंध्र प्रदेश सरकार को ही नहीं, बल्कि राज्य के निर्वाचन आयुक्त, मुख्य सचिव, संबंधित जिलाधिकारी और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों को भी पक्षकार बनाया है। मंत्री पुजारी के अनुसार, राज्य शीर्ष अदालत से अनुरोध करेगा कि आंध्र प्रदेश को भविष्य में ऐसी गतिविधियां नहीं करने का निर्देश दिया जाए। ओडिशा सरकार का कहना है कि कोटिया उसके राज्य का अभिन्न हिस्सा है और वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी तथा प्रशासनिक कदम उठाती रहेगी। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई और आदेश पर निर्भर करेगा।
2021 में भी पंचायत चुनाव को लेकर हुआ था विवाद
कोटिया क्षेत्र में पंचायत चुनाव को लेकर दोनों राज्यों के बीच पहले भी तनाव पैदा हो चुका है। वर्ष 2021 में आंध्र प्रदेश ने विवादित क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराए थे। इसके बाद ओडिशा सरकार ने 2022 में अवमानना याचिका दायर की थी। अब एक बार फिर चुनावी अधिसूचना जारी होने से मामला गरमा गया है। एक अधिकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश प्रशासन ने फागुनासिनेरी, गंजेईपदर और फातूसेनेरी गांवों में दोबारा चुनाव कराने संबंधी अधिसूचना जारी की है।
आगे क्या होगा?
ताजा याचिका के बाद अब इस विवाद में उच्चतम न्यायालय की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ओडिशा सरकार चाहती है कि 2006 के यथास्थिति संबंधी आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए। दूसरी ओर, विवादित गांवों में चुनाव कराने की अधिसूचना को लेकर कानूनी स्थिति पर न्यायालय की सुनवाई अहम होगी। इस मामले का असर दोनों राज्यों के प्रशासनिक संबंधों और सीमावर्ती गांवों में स्थानीय शासन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
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