ओडिशा

Mayurbhanj News : ओडिशा के मयूरभंज में दर्दनाक हादसा, गले में जिंदा मछली फंसने से युवक की मौत

Mayurbhanj News :  ओडिशा के मयूरभंज जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जिले के डिघी गांव में एक युवक की जान महज एक जिंदा मछली के गले में फंस जाने के कारण चली गई। यह हादसा शुक्रवार सुबह का है, जिसने देखते ही देखते पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल पैदा कर दिया। मृतक की पहचान स्थानीय निवासी अविनाश बिजुली के रूप में हुई है। यह घटना न केवल दुखद है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि कैसे जीवन के सामान्य लगने वाले पलों में की गई एक छोटी सी लापरवाही काल का ग्रास बन सकती है।

तालाब में मछली पकड़ने के दौरान हुआ जानलेवा हादसा

अविनाश बिजुली रोजाना की तरह शुक्रवार की सुबह अपने गांव के पास स्थित तालाब में मछली पकड़ने गए थे। वह एक कुशल मछुआरे की तरह शिकार कर रहे थे, तभी उनके हाथ ‘काउ’ प्रजाति की एक मछली लगी, जिसे स्थानीय भाषा में ‘इंडियन कोई’ कहा जाता है। यह मछली अपनी फिसलन और फड़फड़ाहट के लिए जानी जाती है। मछली हाथ से छूट न जाए, इस डर से अविनाश ने उसे अस्थायी रूप से अपने मुंह में दबा लिया। उनका इरादा शायद दूसरी मछली पकड़ने या जाल को संभालने का था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। वह जिंदा मछली उनके मुंह से फिसलकर सीधे गले के अंदर चली गई।

श्वास नली में फंसी मछली और तड़पता हुआ युवक

जैसे ही मछली अविनाश के गले में दाखिल हुई, वह जीवित होने के कारण अंदर ही फड़फड़ाने लगी। कुछ ही सेकंडों के भीतर मछली उनकी श्वास नली (Windpipe) में जाकर बुरी तरह फंस गई। मछली के कांटों और उसके आकार के कारण अविनाश को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी। उन्होंने छटपटाते हुए खुद को बचाने की कोशिश की और आसपास मौजूद लोगों ने भी उनकी सहायता करनी चाही, लेकिन मछली का स्थान ऐसा था कि उसे बाहर निकालना नामुमकिन साबित हो रहा था। ऑक्सीजन की कमी और दम घुटने के कारण अविनाश की हालत तेजी से बिगड़ने लगी और अंततः मौके पर ही उनकी दर्दनाक मृत्यु हो गई।

अस्पताल में डॉक्टरों के व्यवहार पर परिजनों का आक्रोश

इस दुखद घटना के बाद मृतक के परिजनों में भारी रोष व्याप्त है। अविनाश के चाचा बंकिम चंद्र बिजुली ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि हादसे के तुरंत बाद वे अविनाश को लेकर बंगिरिपोसी मेडिकल सेंटर पहुंचे थे। परिजनों का दावा है कि वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों का व्यवहार अत्यंत संवेदनहीन था। बंकिम चंद्र के अनुसार, “डॉक्टरों ने तत्काल प्राथमिक उपचार करने या मछली निकालने की कोशिश करने के बजाय हमें दूसरे अस्पताल रेफर करने की धमकी देना शुरू कर दिया।” परिजनों का मानना है कि यदि समय पर सही चिकित्सा सहायता मिल जाती, तो शायद अविनाश की जान बचाई जा सकती थी।

असावधानी के प्रति एक गंभीर सबक

यह घटना समाज के लिए एक कड़वा सबक है। अक्सर लोग काम की जल्दी या अति-आत्मविश्वास में ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका परिणाम जानलेवा हो सकता है। जिंदा मछली को मुंह में रखना एक पुरानी लेकिन बेहद खतरनाक आदत है, जो कई बार पूर्व में भी हादसों का सबब बनी है। स्थानीय प्रशासन और जागरूक नागरिकों ने इस घटना के बाद लोगों से अपील की है कि वे मछली पकड़ने या अन्य साहसिक गतिविधियों के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखें। अविनाश की असमय मृत्यु ने डिघी गांव के एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है।

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