Operation Sindoo : 2025 के मानसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर आज 29 जुलाई को राज्यसभा में विशेष चर्चा होगी। यह चर्चा करीब 16 घंटे चलेगी, जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेता भाग लेंगे। चर्चा की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे, जबकि विपक्ष की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे इस मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे। चर्चा का उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के निष्कर्षों और हाल के हमलों से जुड़ी सुरक्षा और खुफिया विफलताओं पर विचार करना है।
राजनाथ सिंह, जो पहले ही लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में 100 से अधिक आतंकवादियों के मारे जाने का जिक्र कर चुके हैं, अब राज्यसभा में भी इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे। विपक्ष ने यह भी मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चर्चा में भाग लें और देश को संबोधित करें। इसके अलावा, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और अन्य सहयोगी दलों के सांसद जैसे कि JDU और TDP के सदस्य भी इस विशेष चर्चा में अपनी बात रख सकते हैं।
विपक्ष की ओर से राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चर्चा की शुरुआत करेंगे। वे ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले के दौरान खुफिया विभाग की विफलता के मुद्दे को उठाने की संभावना जताते हैं। कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने भी इस चर्चा में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति की मांग की थी और वे भी इस विषय पर अपने विचार रख सकते हैं। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी और स्योनी घोष भी प्रमुख वक्ता के तौर पर शामिल हो सकते हैं।
लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा बीते दिन 28 जुलाई से शुरू हो चुकी है और आज 29 जुलाई को भी यह जारी रहेगी। इस चर्चा में सत्तापक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख नेता शामिल होंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चर्चा में भाग ले सकते हैं। वहीं, विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, गौरव गोगोई और मनीष तिवारी जैसे नेता महत्वपूर्ण सवाल उठाने की तैयारी में हैं।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में सरकार की चुप्पी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम दावों पर सवाल उठाए थे। इसके अलावा, गौरव गोगोई ने भी केंद्र सरकार से तीखे सवाल किए थे, जो आज भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, NCP की सुप्रिया सुले और AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी भी इस बहस में भाग लेने वाले हैं।
ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर चर्चा के दौरान विभिन्न राजनीतिक खेमों के बीच कड़ा विरोध देखने को मिल सकता है। जहां सत्तापक्ष इस मिशन की सफलता और आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करेगा, वहीं विपक्ष सरकार के खुफिया तंत्र की विफलता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कड़ी आलोचना कर सकता है। इस चर्चा से यह स्पष्ट हो सकता है कि आतंकवाद और सुरक्षा के मसले पर देश में विभिन्न दलों का नजरिया कितना भिन्न है।
ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर होने वाली यह विशेष चर्चा देश की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ ला सकती है। जहां एक ओर सत्तापक्ष सरकार के प्रयासों और उनकी सफलता को सामने लाएगा, वहीं विपक्ष सुरक्षा मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग सकता है। इस चर्चा के परिणाम से यह साफ होगा कि देश में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर विभिन्न दलों की क्या स्थिति है और आगे की सुरक्षा रणनीतियों पर क्या विचार किए जाएंगे।
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