Operation Sindoor
Operation Sindoor : महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में आयोजित ‘पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल’ के दौरान भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों और वहां चल रही आंतरिक उथल-पुथल पर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। जनरल चौहान ने न केवल भारत में प्रस्तावित ‘थिएटर कमांड्स’ की प्रगति पर प्रकाश डाला, बल्कि यह भी बताया कि किस तरह भारतीय सेना के रणनीतिक दबाव ने पाकिस्तान को अपने संविधान में संशोधन करने और अपनी सैन्य संरचना को बदलने पर मजबूर कर दिया है।
जनरल अनिल चौहान ने पुणे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठान के भीतर गहरी बेचैनी पैदा कर दी है। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन की सफलता और भारतीय सेना के आक्रामक रुख के कारण पाकिस्तान को आनन-फानन में संवैधानिक संशोधन करने पड़े। जनरल चौहान के अनुसार, “पाकिस्तान में हाल ही में हुए जल्दबाजी भरे बदलाव इस बात की पुष्टि करते हैं कि उनके लिए चीजें ठीक नहीं रहीं। उन्हें अपनी व्यवस्था में कई गंभीर कमियां और कमजोरियां महसूस हुईं, जिन्हें ढंकने के लिए उन्हें अपने बुनियादी ढांचे में फेरबदल करना पड़ा।”
जनरल चौहान ने पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 243 में हुए संशोधनों का विस्तृत विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने ‘चेयरमैन, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी’ (CJCSC) के पुराने पद को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (CDF) नामक नया पद सृजित किया गया है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान ने यह शर्त रखी है कि इस पद पर केवल थल सेनाध्यक्ष (Army Chief) ही नियुक्त हो सकते हैं। जनरल चौहान ने इसे “संयुक्तता (Jointness) के मूल सिद्धांत के खिलाफ” बताया, क्योंकि इसमें अन्य दो सेनाओं (नौसेना और वायुसेना) की भूमिका गौण हो जाती है।
पाकिस्तानी सेना के भीतर हो रहे बदलावों की चर्चा करते हुए सीडीएस ने ‘नेशनल स्ट्रैटेजी कमांड’ और ‘आर्मी रॉकेट फोर्सेज कमांड’ के गठन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह कहीं न कहीं पाकिस्तान की शक्ति को एक ही केंद्र में केंद्रित करने की कोशिश है। इन नई संरचनाओं के माध्यम से पाकिस्तान अपने पारंपरिक और रणनीतिक (परमाणु) ऑपरेशन्स के बीच तालमेल बिठाने का प्रयास कर रहा है। जनरल चौहान का मानना है कि ‘रॉकेट फोर्सेज कमांड’ का गठन यह दर्शाता है कि पाकिस्तान की सोच अभी भी ‘जमीन केंद्रित’ (Land-centric) है, जो आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के लिए एक चुनौती हो सकती है।
भारत की अपनी सैन्य तैयारियों पर बात करते हुए जनरल चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार ने थियेटर कमांड्स (Joint Theater Commands) की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 30 मई 2026 तक का समय दिया है। हालांकि, भारतीय सेना इस समय सीमा से काफी पहले ही अपना नया ढांचा तैयार करने के लिए पूरी तत्परता से काम कर रही है। उन्होंने इसे अपनी सबसे अहम जिम्मेदारी बताया और आश्वस्त किया कि यह प्रक्रिया अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुँच चुकी है। थिएटर कमांड्स बनने से भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना एक ही नेतृत्व के तहत एकीकृत होकर काम कर सकेंगी।
जनरल चौहान के विश्लेषण के अनुसार, पाकिस्तान में अब आर्मी चीफ के पास पहले से कहीं अधिक ताकत होगी। वे न केवल जमीन पर होने वाले ऑपरेशन्स के लिए जिम्मेदार होंगे, बल्कि सीडीएफ के रूप में नेवी और एयरफोर्स के साथ संयुक्त अभियानों और रणनीतिक-परमाणु मामलों को भी नियंत्रित करेंगे। भारत के लिए यह बदलाव बहुत अहम हैं, क्योंकि इससे दुश्मन की बदलती रणनीति का पता चलता है। भारतीय रक्षा तंत्र इन सभी बदलावों पर पैनी नजर रखे हुए है ताकि देश की सुरक्षा व्यवस्था को किसी भी स्थिति के लिए अभेद्य बनाया जा सके।
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