Stray Dog Attack: सूरजपुर जिले के बसदेई क्षेत्र में शुक्रवार की दोपहर उस समय दहशत का माहौल बन गया, जब दो शासकीय विद्यालयों के परिसर में आवारा कुत्तों ने धावा बोल दिया। इस हिंसक हमले में एक कर्तव्यनिष्ठ शिक्षिका और चार मासूम छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना दोपहर करीब दो बजे की है, जब स्कूल में शैक्षणिक गतिविधियां चल रही थीं। अचानक हुए इस हमले से परिसर में चीख-पुकार मच गई और छात्र अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। विद्यालय प्रबंधन ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत सभी घायलों को बसदेई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया। राहत की बात यह है कि प्राथमिक उपचार के बाद सभी की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है।
विस्तृत विवरण के अनुसार, घटना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बसदेई की है। दोपहर के समय दो छात्र वाशरूम की ओर जा रहे थे, तभी आवारा कुत्तों के एक झुंड ने उन पर प्राणघातक हमला कर दिया। बच्चों की करुण पुकार सुनकर वहां मौजूद शिक्षिका गायत्री सोनी निडरता से उन्हें बचाने के लिए दौड़ीं। हालांकि, हिंसक हो चुके कुत्तों ने उन पर भी झपट्टा मार दिया और उन्हें लहूलुहान कर दिया। वहां मौजूद अन्य लोगों के शोर मचाने पर कुत्ते वहां से भागे, लेकिन उनकी दहशत यहीं खत्म नहीं हुई। भागते हुए कुत्तों ने पास ही संचालित एक अन्य माध्यमिक शाला में प्रवेश किया और वहां भी दो अन्य बच्चों को अपना शिकार बना लिया।
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्कूल परिसर में कुत्तों के जमावड़े का एक बड़ा कारण वहां व्याप्त गंदगी है। उल्लेखनीय है कि इस भवन में दो पालियों में स्कूलों का संचालन होता है—पहली पाली में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय और दूसरी पाली में हिंदी माध्यम विद्यालय। पहली पाली के दौरान छोटे बच्चों को मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) परोसा जाता है। भोजन वितरण के दौरान होने वाली लापरवाही और जूठन को खुले में फेंकने के कारण आवारा कुत्तों का झुंड भोजन की तलाश में हमेशा स्कूल परिसर के आसपास मंडराता रहता है। सफाई व्यवस्था की इसी कमी ने आज इस बड़ी दुर्घटना को जन्म दिया है।
इस पूरी घटना ने विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इतने बड़े शिक्षण संस्थान में आज तक ‘बाउंड्री वॉल’ (सीमा दीवार) का निर्माण नहीं हो सका है। सुरक्षा दीवार न होने के कारण आवारा कुत्ते, मवेशी और असामाजिक तत्व बेरोक-टोक स्कूल के भीतर प्रवेश कर जाते हैं। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग और उच्चाधिकारियों को कई बार लिखित में सूचित किया गया, लेकिन फाइलों में दबे आवेदनों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह प्रशासनिक उदासीनता आज बच्चों की सुरक्षा पर भारी पड़ रही है।
आत्मानंद विद्यालय पिछले दो वर्षों से एक अस्थायी और असुरक्षित भवन में संचालित हो रहा है। नए भवन का निर्माण कार्य ठेकेदार की लापरवाही और सुस्ती के कारण अधर में लटका हुआ है। यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के उन स्पष्ट दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है, जिनमें कहा गया है कि स्कूल परिसर बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित होने चाहिए। न्यायालय ने आवारा पशुओं के नियंत्रण और परिसरों की घेराबंदी को प्राथमिकता देने की बात कही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा हो गया होता और सुरक्षा दीवार बन गई होती, तो शायद आज यह हादसा टला जा सकता था।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बसदेई के प्राचार्य रामचंद्र प्रसाद सोनी ने घटना की पुष्टि करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि घायल शिक्षिका और चारों छात्रों का उचित इलाज सुनिश्चित किया गया है और मामले की आधिकारिक रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को भेज दी गई है। उन्होंने स्वीकार किया कि बाउंड्री वॉल की अनुपस्थिति विद्यालय की सबसे बड़ी सुरक्षा खामी है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या इस घटना के बाद जिम्मेदार विभाग नींद से जागेगा? क्या बच्चों को एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल पाएगा, या फिर किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?
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