Operation Sindoor: भारतीय सेना के प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर अहम जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन पारंपरिक युद्ध की परिभाषा से अलग एक “नए प्रकार का युद्ध” था, जिसमें उच्च तकनीक और सटीक रणनीति का इस्तेमाल किया गया।

CDS चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान पर पहला हमला रात करीब 1 बजे किया गया। इसके पीछे उद्देश्य यह था कि कोई भी आम नागरिक हताहत न हो। उन्होंने इस फैसले को “नैतिक सैन्य रणनीति” बताया, जो भारत की परिपक्वता और जिम्मेदारी को दर्शाता है।

पारंपरिक युद्ध से अलग थी यह कार्यवाही
जनरल चौहान ने कहा कि अब युद्ध का मतलब केवल दुश्मन की जमीन पर कब्जा करना या उसके सैनिकों को मारना नहीं रहा। आज के दौर में युद्ध की परिभाषा बदल गई है। ऑपरेशन सिंदूर में जीत का पैमाना था – हमारी तकनीकी क्षमता, सटीकता और नैतिकता।
उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने अपने देश की सीमा में रहते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। यह एक लंबी दूरी का सटीक हमला था, जिसमें आधुनिक हथियार प्रणाली और रियल टाइम इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया।
क्यों दिया गया जवाब?
दरअसल, यह ऑपरेशन उस समय किया गया जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा एक घातक हमला किया गया था। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने बेहद सुनियोजित तरीके से ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया।
जनरल चौहान ने साफ किया कि यह हमला न केवल जवाबी कार्रवाई थी, बल्कि यह एक संदेश था – कि भारत अब किसी भी प्रकार के आतंकी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा।
भविष्य की पीढ़ी को संदेश
अपने संबोधन में जनरल चौहान ने युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित न रहें, बल्कि वे देश सेवा के लिए आगे आएं और वास्तविक दुनिया में कुछ बड़ा करने का सपना देखें।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सेना की रणनीतिक दक्षता और तकनीकी शक्ति का प्रतीक बनकर उभरा है। यह ऑपरेशन न केवल एक सफल सैन्य कार्रवाई थी, बल्कि एक नई युद्धनीति की शुरुआत भी थी – जहां लक्ष्य सिर्फ जवाब देना नहीं, बल्कि उसे जिम्मेदारी और सटीकता से अंजाम देना है।










