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Election Commission: विपक्ष के निशाने पर ज्ञानेश कुमार! CEC की बढ़ेगी सिरदर्दी, जानें क्या है पूरा मामला

Election Commission: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए विपक्षी दल एक बार फिर लामबंद होते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को विफल करने के बाद उत्साह से भरे विपक्ष ने अब सीईसी को हटाने के लिए एक नया प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। पूर्व में दिए गए नोटिसों के खारिज होने के बावजूद, विपक्षी गठबंधन इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसे प्रमुख दलों के शीर्ष नेता इस दिशा में सक्रिय संवाद कर रहे हैं और जल्द ही एक नया मसौदा पेश करने की योजना बना रहे हैं।

सांसदों का नया गठबंधन: मसौदा तैयार करने में जुटे वरिष्ठ नेता

बताया जा रहा है कि इस नए नोटिस को तैयार करने की जिम्मेदारी विपक्ष के पाँच वरिष्ठ सांसदों को सौंपी गई है। ये नेता ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नए और अधिक पुख्ता आरोपों की सूची तैयार कर रहे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रस्ताव को पहले लोकसभा में पेश किया जाएगा या राज्यसभा में, अथवा पिछली बार की तरह दोनों सदनों में एक साथ लाया जाएगा। संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार को घेरने में मिली सफलता के बाद विपक्ष को भरोसा है कि इस बार प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों की संख्या पहले से कहीं अधिक होगी।

200 सांसदों के समर्थन का लक्ष्य: सरकार को कड़ा संदेश देने की रणनीति

इस बार विपक्ष केवल प्रस्ताव लाना ही नहीं चाहता, बल्कि अपनी संख्या बल के जरिए एक ‘मजबूत संदेश’ भी देना चाहता है। रणनीति के मुताबिक, लोकसभा से कम से कम 200 सांसदों और राज्यसभा से लगभग 80 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। विपक्ष का तर्क है कि पिछली बार उनके समर्थन को कम आंका गया था, इसलिए इस बार वे अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करना चाहते हैं। अगले सप्ताह तक यह नया प्रस्ताव सदन के पटल पर रखे जाने की संभावना जताई जा रही है।

पूर्व में लगाए गए आरोप और उनकी गंभीरता

विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को बनाए रखने में विफल रहने के गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का दावा है कि आयोग कार्यपालिका के दबाव में काम कर रहा है और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव है। विशेष रूप से बिहार जैसे राज्यों में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करने और डेटा साझा न करने जैसे आरोप मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली सत्ताधारी दल भाजपा के अनुकूल रही है।

पिछले नोटिसों का खारिज होना और संवैधानिक प्रावधान

उल्लेखनीय है कि 12 मार्च को विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इसी तरह का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने खारिज कर दिया था। पीठासीन अधिकारियों का कहना था कि विपक्ष प्रथम दृष्टया दुर्व्यवहार का मामला साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया। संवैधानिक नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के प्रस्ताव के लिए लोकसभा में न्यूनतम 100 और राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। पिछली बार विपक्ष के पास लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 सदस्यों का समर्थन था, जो निर्धारित सीमा से अधिक था। अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष नए सबूतों के साथ सदन के अध्यक्षों को संतुष्ट कर पाएगा।

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