Cracker Factory Accident
Cracker Factory Accident : तमिलनाडु का विरुदुनगर जिला एक बार फिर बारूद के ढेर पर हुए धमाके से दहल गया है। रविवार को यहाँ के कट्टनार पट्टी स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में हुए जोरदार विस्फोट ने 16 लोगों की जान ले ली। अग्निशमन एवं बचाव विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री की इमारत के परखच्चे उड़ गए। मलबे के नीचे कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है, जिससे मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। घटना स्थल पर बचाव दल मुस्तैदी से राहत कार्यों में जुटा हुआ है।
यह दर्दनाक हादसा दोपहर के वक्त हुआ, जब फैक्ट्री में काम अपने चरम पर था। बताया जा रहा है कि गोविंदनाल्लूर निवासी मुथु मानिकम की इस फैक्ट्री में फैंसी पटाखे बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है। चश्मदीदों और पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, जिस समय मजदूर पटाखों की लंबी लड़ियां पिरोने के काम में मशगूल थे, तभी किसी अज्ञात कारण से घर्षण या चिंगारी की वजह से बारूद ने आग पकड़ ली। कुछ ही सेकंडों में पूरी यूनिट एक आग के गोले में तब्दील हो गई, जिससे वहां काम कर रहे लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिला।
इस भीषण अग्निकांड में 6 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें तत्काल विरुदुनगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों की स्थिति नाजुक बनी हुई है क्योंकि उनमें से कई का शरीर 80 प्रतिशत से ज्यादा झुलस चुका है। प्रशासन ने अस्पताल में विशेष चिकित्सा टीम तैनात की है ताकि घायलों को बेहतर इलाज मिल सके। घटनास्थल पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और वे अपने अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।
पटाखा फैक्ट्रियों में होने वाले ये हादसे अब एक डरावनी रस्म बनते जा रहे हैं। इसी साल फरवरी 2026 में आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले से भी ऐसी ही एक खौफनाक खबर आई थी। वहां वेत्लापलेम गांव की एक पटाखा निर्माण इकाई में हुए विस्फोट में 21 मजदूरों की जान चली गई थी। उस समय मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के आश्रितों को 20 लाख रुपये के मुआवजे का आश्वासन दिया था। विरुदुनगर की आज की घटना ने एक बार फिर उन जख्मों को ताजा कर दिया है और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत में पटाखा निर्माण का केंद्र होने के कारण विरुदुनगर और आसपास के इलाकों में अक्सर ऐसे हादसे होते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फैक्ट्रियों में तय सुरक्षा नियमों की अनदेखी, क्षमता से अधिक बारूद का भंडारण और अप्रशिक्षित मजदूरों का इस्तेमाल इन मौतों की मुख्य वजह है। सरकार को अब केवल मुआवजे के ऐलान तक सीमित न रहकर, जमीनी स्तर पर सख्त इंस्पेक्शन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है।
विरुदुनगर की इस त्रासदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बारूद के साथ काम करने वाले इन संस्थानों में सुरक्षा ऑडिट महज कागजों तक सीमित है। जब तक फैक्ट्री मालिकों और स्थानीय प्रशासन के बीच जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक गरीब मजदूरों की जान इसी तरह सस्ते पटाखों की कीमत चुकाती रहेगी। फिलहाल, पुलिस ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस और जरूरी अग्नि सुरक्षा उपकरण मौजूद थे।
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