Owaisi Bill Opposition : देश में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को आपराधिक मामलों में गिरफ्तार होने के बाद पद से हटाने को लेकर लाए गए विधेयक पर सियासी विवाद तेज हो गया है। हैदराबाद के सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने केंद्र सरकार की इस पहल को संविधान के मूल सिद्धांतों से टकराने वाला करार दिया और सवाल उठाए कि क्या राष्ट्रपति बिना मंत्री परिषद की सलाह के प्रधानमंत्री को पद से हटा सकते हैं।
ओवैसी ने कहा कि देश में सभी केंद्रीय जांच एजेंसाओं जैसे सीबीआई और ईडी की नियुक्ति स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक ये एजेंसियां केंद्र सरकार के प्रभाव से मुक्त नहीं होंगी, तब तक वे निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएंगी। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति, जो मंत्री परिषद के सलाहकार होते हैं, बिना प्रधानमंत्री की मंजूरी के उन्हें पद से कैसे हटा सकते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने पूछा कि क्या राष्ट्रपति किसी प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांग सकते हैं। ओवैसी ने यह भी बताया कि यह विधेयक संविधान के मौलिक अनुच्छेदों के साथ विरोधाभास करता है और इसलिए इसे लागू करना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल केंद्र की सत्ता को और मजबूत करने के लिए उठाया गया है, जिससे लोकतंत्र कमजोर होगा।
130वें संविधान संशोधन को लेकर ओवैसी ने कई खामियां गिनाई। उनका कहना था कि यह संशोधन पूरे देश पर कब्जा करने की रणनीति है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार इस कानून का दुरुपयोग करते हुए राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने और मंत्रियों को गिरफ्तार कर सरकार गिराने का हथियार बना सकती है।
ओवैसी ने सरकार से यह मांग भी की कि अगर वे नैतिकता की बात करते हैं, तो ऐसे कानून भी बनाए जाएं कि जो कोई भी गिरफ्तार हो, वह दूसरी पार्टी खासकर बीजेपी में शामिल न हो। इससे राजनीतिक साजिशों पर रोक लगेगी।
ओवैसी ने बिहार के हालिया एसआईआर (सर्वे ऑफ इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2002-2003 में सात प्रदेशों में चुनाव आयोग द्वारा कराया गया एसआईआर 243 दिनों तक चला था, लेकिन इस बार की प्रक्रिया मात्र 97 दिनों में पूरी कर ली गई है। उन्होंने इसे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बताया।
ओवैसी ने यह भी कहा कि पहले जिन लोगों का नाम वोटर लिस्ट में था, उनके नागरिकता के सबूत नहीं मांगे गए थे, जबकि अब बिना उचित जांच के जल्दी से वोटर सूची बनाई जा रही है। उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वे नागरिकता की जांच करने के बजाय इसे गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी बता रहे हैं, जिससे आम जनता में असमंजस और परेशानी बढ़ रही है। असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने के लिए प्रस्तावित विधेयक पर गहरा विरोध जताते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका यह विवादित बयान देश की सियासत में नई बहस को जन्म दे रहा है।
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