Owaisi Opposition : लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब पूरा देश सरकार के साथ था और ऑपरेशन सिंदूर को समर्थन दे रहा था, तो सरकार ने इसका पूरा फायदा नहीं उठाया। ओवैसी ने पाकिस्तान की सैन्य ताकत और ISI के मंसूबों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए और कहा कि पाकिस्तानी सेना और ISI का एकमात्र उद्देश्य भारत को कमजोर करना है।
ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को लेकर सवाल किया, जिसमें उन्होंने कहा था, “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते, आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती।” ओवैसी ने इसे याद दिलाया और कहा कि जब इस बयान के बाद कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा हमले किए गए थे, तब सरकार ने पाकिस्तान के साथ व्यापार बंद कर दिया और पाकिस्तान के विमानों को हमारी सीमा में प्रवेश करने से रोक दिया। उन्होंने पूछा, “क्या आपकी आत्मा जीवित है? क्यों नहीं इन घटनाओं का जवाब दिया गया?”
ओवैसी ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच के आयोजन पर भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब हम पाकिस्तान को पानी तक नहीं दे रहे हैं, तब भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच खेलना एक असंवेदनशील कदम है। ओवैसी ने यह भी पूछा कि क्या इस सरकार में इतनी हिम्मत है कि वह 25 मारे गए नागरिकों के परिवारों से कह सके कि “हमने बदला ले लिया है, अब आप पाकिस्तान के साथ मैच देख सकते हैं?” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार की नीति इतनी लचर हो गई है कि मारे गए लोगों की याद में कोई संवेदना नहीं दिखाई जा रही है।
ओवैसी ने सवाल किया कि अगर सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बावजूद हमले हो रहे हैं, तो इसका मतलब है कि सरकार की नीति नाकाम हो गई है। उन्होंने विशेष रूप से कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उदाहरण दिया और पूछा कि इतनी बड़ी सैन्य ताकत होने के बावजूद यह हमला कैसे हुआ। उन्होंने सरकार से पूछा कि जिम्मेदारी किसकी है? क्या यह आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों की लापरवाही है?
ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू और कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के सेना प्रमुख को राष्ट्रपति भवन बुलाकर स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे विरोधाभासी कदमों से सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठते हैं। ओवैसी ने यह भी पूछा कि अगर पाकिस्तान और इजराइल “फेल्ड स्टेट्स” हैं, तो फिर पाकिस्तान के सेना प्रमुख को भारतीय राष्ट्रपति भवन बुलाकर सम्मानित करना कैसे उचित था?
ओवैसी ने सरकार की नीतियों को असफल बताते हुए कहा कि जब सुरक्षा के बड़े दावे किए गए थे, तो क्यों आतंकवादी हमले जारी हैं? उन्होंने सरकार को अपनी नीतियों पर पुनः विचार करने और जिम्मेदारी तय करने का आग्रह किया। उनके मुताबिक, अगर सरकार ऑपरेशन सिंदूर, सर्जिकल स्ट्राइक, और बालाकोट जैसे अभियानों का हवाला देकर खुद को सही ठहराती है, तो उन्हें इन घटनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ा है, और उन्हें जवाबदेही से बचने का कोई अधिकार नहीं है। इस प्रकार, ओवैसी ने एक बार फिर सरकार को घेरते हुए न केवल पाकिस्तान से रिश्तों, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति पर सवाल उठाए।
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