Owaisi vs Bhagwat
Owaisi vs Bhagwat: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा ‘लव जिहाद’ पर दिए गए हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। ओवैसी ने भागवत को चुनौती देते हुए कहा कि संघ और भाजपा या तो ‘लव जिहाद’ शब्द का स्पष्ट अर्थ समझाएं या फिर इस संबंध में देश के सामने आधिकारिक और ठोस आंकड़े पेश करें। उन्होंने इस मुद्दे को युवाओं का ध्यान भटकाने वाला बताया और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि यदि देश में ‘लव जिहाद’ जैसी कोई घटना बड़े पैमाने पर हो रही है, तो सरकार संसद में इसका डेटा पेश क्यों नहीं करती? उन्होंने कहा, “आप अपनी 11 साल की सरकार का रिकॉर्ड दिखा दें या उन राज्यों का डेटा दे दें जहाँ भाजपा की सरकारें हैं।” ओवैसी ने तर्क दिया कि बिना किसी ठोस सबूत या आधिकारिक परिभाषा के इस तरह के आरोप लगाना केवल समाज में विद्वेष फैलाने की कोशिश है।
व्यक्तिगत पसंद और संवैधानिक अधिकारों पर बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि भारत का कानून हर बालिग नागरिक को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा, “अगर कोई 18 या 21 साल का नागरिक अपना फैसला खुद ले रहा है, तो यह किसी की पसंद-नापसंद का मामला नहीं है, बल्कि यह उनका कानूनी अधिकार है।” ओवैसी ने भागवत के उस तर्क पर भी निशाना साधा जिसमें कहा गया था कि हिंदू परिवारों में संवाद की कमी के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं। ओवैसी ने पूछा कि क्या संघ के पास इन दावों को साबित करने के लिए कोई प्रमाण है?
ओवैसी ने भाजपा के भीतर मौजूद ‘अंतर्धार्मिक विवाहों’ (Inter-religious marriages) का जिक्र करते हुए सत्ता पक्ष को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा ‘लव जिहाद’ को परिभाषित करेगी, तो उसे यह भी बताना होगा कि उनकी ही पार्टी के उन बड़े नेताओं के बारे में क्या राय है जिन्होंने दूसरे धर्मों में शादियां की हैं। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि वह किसी के निजी जीवन पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन जब नीति की बात आती है, तो यह दोहरा मापदंड स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
लेख के अंत में ओवैसी ने देश की ज्वलंत समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि आज भारत के नौजवानों को रोजगार और बेहतर भविष्य की जरूरत है, लेकिन सरकार और संघ जानबूझकर उन्हें ‘लव जिहाद’ जैसे गैर-जरूरी मुद्दों में उलझा रहे हैं। ओवैसी के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ‘लव जिहाद’ जैसे विवादों को हवा दी जाती है, जो लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है।
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