Pakistan Accuses India
Pakistan Accuses India: पाकिस्तानी सेना की प्रॉपगैंडा विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी सेना के मुख्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारत, अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकवादी समूहों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत के समर्थन और फंडिंग की मदद से ये आतंकी संगठन पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। आईएसपीआर के अनुसार, साल 2025 में पाकिस्तान को जिन अभूतपूर्व सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा, उनके पीछे मुख्य रूप से भारत का ही हाथ है।
डीजी आईएसपीआर लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने अपनी दलीलों में ‘नए निवेश पैटर्न’ का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि आतंकवादी संगठन अफगान क्षेत्र को अपने ऑपरेशनल बेस (गतिविधियों के केंद्र) के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि उन्हें आर्थिक रसद और रणनीतिक समर्थन भारत से प्राप्त हो रहा है। चौधरी ने जोर देकर कहा, “पाकिस्तान को प्रभावित करने वाला सबसे प्रमुख पैटर्न सीधे तौर पर भारत की ओर इशारा करता है।” पाकिस्तानी सेना का कहना है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी ताकतों को ट्रेनिंग देने और उन्हें प्रायोजित करने के लिए किया जा रहा है, जिसे भारत का मौन या प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है।
पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता ने आतंकवाद के पनपने के पीछे “युद्ध अर्थव्यवस्था” (War Economy) को एक बड़ा कारण बताया। उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के नाम पर लगभग 147 बिलियन डॉलर खर्च किए गए थे, लेकिन यह पैसा वास्तव में कहां गया, यह एक बड़ा रहस्य है। चौधरी के अनुसार, जब इस तरह का वित्तीय प्रवाह रुक जाता है, तो युद्ध और संघर्ष पर निर्भर रहने वाले समूह अपनी अस्तित्व रक्षा के लिए पूरे क्षेत्र में आतंकवाद फैलाना शुरू कर देते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण ये समूह अब बाहरी ताकतों के मोहरे बन रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी सैन्य वापसी के बाद अफगानिस्तान में छूटे हथियारों पर भी चिंता जताई गई। डीजी आईएसपीआर ने कहा कि लगभग 7.2 बिलियन डॉलर मूल्य के उन्नत अमेरिकी सैन्य उपकरण और हथियार अफगानिस्तान में पीछे रह गए थे, जो अब आतंकी समूहों के हाथ लग चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्ही आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ हमलों में किया जा रहा है। चौधरी ने कहा कि 2021 के बाद अफगानिस्तान के घटनाक्रमों ने दक्षिण एशिया में आतंकवाद के पूरे परिदृश्य को बदल दिया है, जिससे पाकिस्तान के लिए आंतरिक और सीमावर्ती चुनौतियां कई गुना बढ़ गई हैं।
अंत में, पाकिस्तानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अफगान तालिबान के बीच हुए ‘दोहा समझौते’ की विफलता का जिक्र किया। आईएसपीआर प्रवक्ता ने कहा कि समावेशी सरकार बनाने और अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए न होने देने के वादे पूरे नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे प्रतिबंधित संगठन अब खुलकर अफगानिस्तान से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। पाकिस्तान का दावा है कि इन संगठनों को भारत से मिलने वाली फंडिंग ने क्षेत्र की शांति को अस्थिर कर दिया है, जिससे 2023 से पाकिस्तान को इनके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करना पड़ा है।
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