Pakistan-Afghanistan War
Pakistan-Afghanistan War: शनिवार की रात अफगान-पाक सीमा पर स्थित डूरंड लाइन के आसपास के इलाकों में भारी सैन्य हलचल देखी गई। पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रवेश कर जबरदस्त बमबारी की। सूत्रों के अनुसार, यह हमला मुख्य रूप से प्रतिबंधित संगठन ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) के ठिकानों को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया था। इस सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे संबंधों में और अधिक कड़वाहट आने की संभावना प्रबल हो गई है।
पाकिस्तानी वायु सेना के फाइटर जेट्स ने अफगानिस्तान के कई हिस्सों को निशाना बनाया। अफगान मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, पक्तिका प्रांत के बरमाल जिले में एक अज्ञात मदरसे पर भी बम गिराए गए। पाकिस्तान सरकार का दावा है कि उन्होंने खुफिया जानकारी के आधार पर टीटीपी और उसके सहयोगी संगठनों से जुड़े कुल सात आतंकी शिविरों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह एक “चुनिंदा लक्ष्यीकरण” (Selective Targeting) ऑपरेशन था, जिसे विशिष्ट इनपुट मिलने के बाद अंजाम दिया गया।
इस हवाई हमले के मानवीय परिणाम गंभीर रहे हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में कम से कम 17 अफगान नागरिकों की जान चली गई है। अफगान तालिबान ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह के हमलों का उचित समय पर करारा जवाब दिया जाएगा। पक्तिका और नंगरहार प्रांत के विभिन्न जिलों, जैसे खोग्यानी और बेहसूद में भी बमबारी की खबरें हैं, जिससे स्थानीय आबादी में दहशत का माहौल है।
पाकिस्तान ने इस एयरस्ट्राइक को हाल ही में हुए आत्मघाती हमलों का जवाब बताया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार के अनुसार, इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में हुए आत्मघाती विस्फोट और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में हुए हमलों के पीछे अफगानिस्तान में बैठे आतंकियों का हाथ था। मस्जिद विस्फोट में 31 से अधिक लोगों की जान गई थी, जिसकी जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (IS) ने ली थी। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान प्रशासन अपनी धरती का उपयोग पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए होने दे रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन है।
पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। पाकिस्तान बार-बार तालिबान पर टीटीपी को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों को नकारता आया है। 2008 के मैरियट होटल विस्फोट के बाद से इस्लामाबाद ने सुरक्षा चुनौतियों का इतना बड़ा संकट पहले कभी नहीं देखा था। वर्तमान हवाई हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान अब ‘बॉर्डर पार’ जाकर कार्रवाई करने की रणनीति अपना रहा है, जिससे दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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