Iran Exposes Pakistan : अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के दावों की पूरी तरह से पोल खोलकर रख दी है। दरअसल, शहबाज शरीफ ने हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित महासमझौते (पीस डील) को लेकर वैश्विक मंच पर एक बेहद बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता अंतिम चरण में है और अगले 24 घंटों के भीतर इस ऐतिहासिक डील पर सहमति बन जाएगी, जिसके तुरंत बाद इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर भी कर दिए जाएंगे।

हालांकि, अब इस मामले में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है, क्योंकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरान ने साफ शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि रविवार (14 जून) को इस तरह के किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होने जा रहे हैं।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी दावे पर उठाए गंभीर सवाल
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के इस अपरिपक्व दावे के तुरंत बाद ईरान सरकार हरकत में आई और उसने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ईरान के विदेश मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने शहबाज शरीफ के दावों पर कड़े सवाल खड़े करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया। प्रवक्ता ने कहा कि ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ पर आने वाले कुछ दिनों या हफ्तों में हस्ताक्षर होने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसकी किसी निश्चित और तय तारीख को लेकर इस समय दुनिया के सामने कोई भी दावा करना बेहद जल्दबाजी होगी।
ईरान की तरफ से आए इस स्पष्टीकरण के बाद शहबाज शरीफ के उस दावे पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं, जिसमें उन्होंने अगले 24 घंटे में समझौते के फाइनल होने की बात कही थी। इस घटनाक्रम से दोनों पड़ोसी देशों (ईरान और पाकिस्तान) के आधिकारिक बयानों में एक बड़ा विरोधाभास और कूटनीतिक तालमेल की भारी कमी साफ तौर पर उजागर हो गई है।
कूटनीतिक हिचकिचाहट और ईरान की संभलकर बयान देने की हिदायत
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने वार्ता की जमीनी हकीकत को बयां करते हुए मीडिया से कहा, “एक तरफ जहां इस्लामाबाद मेमोरेंडम पर भविष्य में सहमति बनने की उम्मीदें जीवित हैं, वहीं दूसरी ओर से (संभवतः अमेरिकी पक्ष की तरफ से) दिख रही कूटनीतिक हिचकिचाहट को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में डील पर हस्ताक्षर होने की सटीक तारीख को लेकर किसी भी प्रकार का सार्वजनिक वक्तव्य जारी करने में अत्यधिक सावधानी और परिपक्वता बरतनी चाहिए।” ईरानी प्रवक्ता का यह इशारा सीधे तौर पर पाकिस्तानी नेतृत्व की उस बचकानी जल्दबाजी की तरफ था, जिसने बिना अंतिम सहमति के ही समझौते का ढिंढोरा पीट दिया था।

डिजिटल हस्ताक्षर और अगले दौर की वार्ता को लेकर शहबाज का उत्साह
ईरान द्वारा इस दावे का खंडन किए जाने से पहले, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बेहद उत्साह में आकर सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘हम इस समय अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक पीस डील के इतिहास में सबसे ज़्यादा करीब पहुंच चुके हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि अगले 24 घंटों के भीतर यह समझौता पूरी तरह फाइनल रूप ले लेगा। इसके तुरंत बाद, पाकिस्तान इस पीस डील पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से (डिजिटल मोड में) हस्ताक्षर करने की अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है। इसके बाद, आगामी अगले हफ्ते से दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर की व्यापक कूटनीतिक बातचीत का अगला दौर शुरू किया जाएगा।’
समय से पहले ही शहबाज शरीफ ने दोनों महाशक्तियों को दे डाला था धन्यवाद
इतना ही नहीं, कूटनीतिक मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए शहबाज शरीफ ने समझौते पर अंतिम मुहर लगने से पहले ही दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व का आभार भी जता दिया था। उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा था, ‘हम इस लंबी और जटिल बातचीत के दौरान लगातार अपनी सकारात्मक प्रतिबद्धता बनाए रखने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के नेतृत्व का विशेष रूप से शुक्रिया करना चाहते हैं।
इसके साथ ही, इस अशांत इलाके में शांति स्थापना के लिए हमारे भाइयों द्वारा दिए गए निरंतर सहयोग के लिए हम उनका दिल से आभार व्यक्त करते हैं। हमें पूरा अटूट विश्वास है कि यह ऐतिहासिक पीस डील दुनिया में स्थायी शांति के लिए एक बेहद मज़बूत आधार स्तंभ बनेगी।’ हालांकि, ईरान के कड़े रुख ने अब यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान का यह दावा पूरी तरह से जमीनी हकीकत से परे और केवल राजनीतिक वाहवाही लूटने की एक नाकाम कोशिश थी।
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