Pakistan Hockey Crisis
Pakistan Hockey Crisis: पाकिस्तान क्रिकेट टीम की भारत के हाथों टी20 वर्ल्ड कप 2026 में हुई करारी हार के बाद पड़ोसी देश के खेल गलियारों में पहले से ही मातम पसरा था, लेकिन अब पाकिस्तानी हॉकी टीम के साथ हुई बदसलूकी ने आग में घी डालने का काम किया है। हाल ही में एफआईएच (FIH) प्रो लीग के दूसरे चरण के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंची पाकिस्तानी टीम को सिडनी एयरपोर्ट पर जो झेलना पड़ा, उसने खेल जगत को शर्मसार कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, खिलाड़ियों के ठहरने और होटल व्यवस्था के लिए सरकार ने 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया था, लेकिन इसके बावजूद खिलाड़ियों को एयरपोर्ट पर 13 से 14 घंटे तक बिना किसी व्यवस्था के इंतजार करना पड़ा। इस घोर अव्यवस्था ने पाकिस्तान फेडरेशन की पोल खोलकर रख दी है।
देश वापस लौटने पर टीम के कप्तान अम्माद बट ने चुप्पी तोड़ते हुए प्रेस के सामने फेडरेशन की काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। अम्माद ने बताया कि टीम मैनेजमेंट और अधिकारियों ने खिलाड़ियों के साथ कैसा बर्ताव किया। हालांकि, सच बोलना कप्तान को महंगा पड़ गया। पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) के अध्यक्ष तारिक बुगाती ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अनुशासनहीनता का हवाला दिया और अम्माद बट पर 2 साल का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया। इस फैसले ने पाकिस्तान के खेल प्रेमियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, क्योंकि अम्माद बट ने केवल अपनी टीम के हक और जायज सुविधाओं की मांग उठाई थी।
अम्माद बट पर प्रतिबंध लगाने के कुछ ही घंटों बाद एक और चौंकाने वाला घटनाक्रम हुआ। पीएचएफ अध्यक्ष तारिक बुगाती ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बुगाती ने अपना इस्तीफा सीधे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भेजा। उन्होंने अपने बयान में न केवल पद छोड़ने की बात कही, बल्कि प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान हुई पूरी वित्तीय और प्रशासनिक अव्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह भी किया। विशेषज्ञों का मानना है कि बुगाती ने खुद को संभावित जांच और जनता के गुस्से से बचाने के लिए ‘इस्तीफा कार्ड’ खेला है, जबकि अंदरूनी तौर पर मामले को दबाने की कोशिशें जारी हैं।
अम्माद बट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक और सनसनीखेज खुलासा किया था कि पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड और पीएचएफ ने पिछले काफी समय से खिलाड़ियों को उनका ‘दैनिक भत्ता’ (Daily Allowance) तक नहीं दिया है। खिलाड़ी विदेशों में बिना पैसों के संघर्ष कर रहे थे, जबकि कागजों पर लाखों रुपये खर्च दिखाए जा रहे थे। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड और पीएचएफ के अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं। दोनों संस्थाएं एक-दूसरे पर फंड की हेराफेरी और कुप्रबंधन का आरोप लगा रही हैं। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में पाकिस्तान का राष्ट्रीय खेल ‘हॉकी’ पूरी तरह बर्बादी की कगार पर पहुँच गया है।
वर्तमान स्थिति यह है कि पाकिस्तान में न केवल क्रिकेट बल्कि हॉकी जैसे गौरवशाली खेल का ढांचा भी चरमरा गया है। एक तरफ जहां अन्य देश अत्याधुनिक तकनीकों और सुविधाओं पर ध्यान दे रहे हैं, वहीं पाकिस्तानी खिलाड़ी बुनियादी सुविधाओं और सम्मान के लिए भी तरस रहे हैं। कप्तान अम्माद बट पर लगा प्रतिबंध और अध्यक्ष का इस्तीफा यह साबित करता है कि खेल के भीतर राजनीति और भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। यदि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का प्रदर्शन और भी रसातल में जा सकता है।
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