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Balochistan Crisis: बलूचिस्तान में सेना की करारी हार और BLA का खौफ, क्या इसीलिए पाकिस्तान फिर अलाप रहा है कश्मीर राग?

Balochistan Crisis: पाकिस्तान वर्तमान में अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। देश की आर्थिक बदहाली के बीच सुरक्षा मोर्चे पर भी सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है। विशेष रूप से बलूचिस्तान प्रांत में स्थिति अब इस्लामाबाद के नियंत्रण से बाहर निकल चुकी है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के उग्रवादियों ने पाकिस्तानी सेना की नाक में दम कर रखा है। आधिकारिक आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2025 बलूचिस्तान के लिए रक्तपात से भरा रहा है, जहाँ 432 से अधिक हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं। इन हमलों में लगभग 205 सुरक्षा कर्मियों और 248 आम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जो पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र की विफलता का स्पष्ट प्रमाण है।

बीएलए का ‘ऑपरेशन हेरोफ’ और चीन की बढ़ती चिंताएं

इस साल की शुरुआत में बीएलए ने ‘ऑपरेशन हेरोफ’ (Operation Herof) के जरिए पाकिस्तानी सेना को सीधी चुनौती दी। इस ऑपरेशन के तहत उग्रवादियों ने बड़े पैमाने पर सुनियोजित हमले किए, जिनमें दावा किया गया कि 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। इस निरंतर बढ़ती हिंसा का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी पड़ रहा है। चीन, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा निवेशक है, अब अपने नागरिकों और निवेश की सुरक्षा को लेकर आशंकित है। बीएलए के बढ़ते हमलों के डर से चीन ने ग्वादर में अपना मुख्य कैंप अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिससे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र में गुहार और सेना की अतिरिक्त तैनाती

बलूचिस्तान में उग्रवाद से निपटने में नाकाम रहने के बाद अब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दुहाई दे रहा है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से आधिकारिक तौर पर बीएलए को एक वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित करने की मांग की है। वहीं, घरेलू मोर्चे पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने घोषणा की है कि अशांत क्षेत्रों में स्थिति को काबू करने के लिए और अधिक सैन्य टुकड़ियों की तैनाती की जाएगी। हालांकि, जानकारों का मानना है कि केवल बल प्रयोग से बलूच विद्रोह को दबाना मुश्किल है, क्योंकि वहां की जनता में सरकार के प्रति गहरा असंतोष व्याप्त है।

नाकामियों को छिपाने के लिए फिर शुरू हुआ ‘कश्मीर प्रोपेगेंडा’

अपनी सैन्य और रणनीतिक विफलताओं से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान की सरकार ने एक बार फिर अपने पुराने ‘कश्मीर राग’ का सहारा लिया है। कश्मीर एकजुटता दिवस के अवसर पर पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की। डार ने 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में भारत द्वारा किए गए विकास कार्यों और प्रशासनिक बदलावों पर झूठे आरोप लगाए। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इशाक डार की यह ‘गीदड़भभकी’ केवल घरेलू जनता को गुमराह करने और बलूचिस्तान में हो रही किरकिरी से बचने का एक राजनीतिक हथकंडा है।

भारत का कड़ा रुख: आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

भारत ने पाकिस्तान के इन निराधार दावों और प्रोपेगेंडा को हमेशा की तरह सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली ने स्पष्ट रूप से वैश्विक समुदाय को बता दिया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग और आंतरिक मामला है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को इस विषय पर बोलने का न तो कोई नैतिक अधिकार है और न ही कोई कानूनी आधार। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की यह खोखली बयानबाजी जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकती। पाकिस्तान अब कश्मीर के नाम पर न तो अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटा पा रहा है और न ही अपनी जनता को अपनी आंतरिक नाकामियों से और अधिक समय तक अंधेरे में रख सकता है।

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