Pakistan-US Missile Deal: पाकिस्तान और अमेरिका के बीच एक संभावित मिसाइल रक्षा सौदे ने भारत की रणनीतिक चिंताओं को एक बार फिर बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की ओर से गुपचुप तरीके से AIM-120 एडवांस मीडियम रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (AMRAAM) की एक डील को मंजूरी दी गई है, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है।

इस डील की जानकारी एक्सप्रेस ट्रिब्यून और PTI की रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में जिन देशों को यह मिसाइलें बेचने का नोटिफिकेशन जारी किया है, उसमें पाकिस्तान का नाम भी है।

क्या है AIM-120C8 AMRAAM मिसाइल?
AIM-120C8 मिसाइल, अमेरिका की AIM-120D श्रृंखला की एक उन्नत वर्जन है। इसे RTX (पूर्व रेथियॉन) कंपनी द्वारा विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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रेंज: 160 से 180 किलोमीटर (लॉन्च प्लेटफॉर्म पर निर्भर)
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स्पीड: मैक 4 (आवाज की गति से 4 गुना तेज)
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गाइडेंस: एक्टिव रडार होमिंग सिस्टम
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क्षमता: एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को साधने में सक्षम
यह मिसाइलें विशेष रूप से F-16, F/A-18, F-22, Gripen, और F-35 जैसे लड़ाकू विमानों के लिए डिजाइन की गई हैं। पाकिस्तान के पास पहले से F-16 फाइटर जेट्स का बेड़ा है, जो अब इन मिसाइलों के जरिए और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग में तेजी आई है। इस डील की खबर उस समय आई है जब पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जनरल आसिम मुनीर और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई मीटिंग की चर्चा जोरों पर है। इस बैठक के बाद अमेरिका और पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा मिलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
अमेरिका, चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल कर सकता है।
भारत की चिंता: क्या बदलेगा शक्ति संतुलन?
यह मिसाइल डील भारत के लिए रणनीतिक रूप से एक गंभीर संकेत है।
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पाकिस्तान यदि F-16 फ्लीट को AIM-120C8 जैसे अत्याधुनिक मिसाइलों से लैस करता है, तो इसकी एयर पावर में भारी इजाफा होगा।
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फरवरी 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुई हवाई झड़प में भी पाकिस्तान ने AMRAAM मिसाइलों का इस्तेमाल किया था।
हालांकि भारत के पास राफेल, सुखोई-30MKI, तेजस जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान हैं, जिनमें Meteor, Astra जैसी आधुनिक मिसाइलें लगी हैं, फिर भी यह डील दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को चुनौती दे सकती है।
भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया क्या हो सकती है?
भारत को चाहिए कि वह:
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अपनी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को और अधिक उन्नत करे
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राफेल जैसे अधुनातन लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाए
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अमेरिका से इस डील पर राजनयिक स्तर पर स्पष्टीकरण मांगे
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QUAD और अन्य रणनीतिक गठबंधनों के जरिए दबाव बनाए
पाकिस्तान-अमेरिका के बीच यह मिसाइल सौदा केवल सैन्य सहयोग नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ा सवाल बनकर उभरा है। भारत को अपनी रक्षा नीति में तेजी से कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य की किसी भी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।










