Teejan Bai Health
Teejan Bai Health : छत्तीसगढ़ की माटी और वहां की समृद्ध लोक संस्कृति को देश-दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने वाली विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई की तबीयत अचानक बहुत अधिक बिगड़ गई है. स्थानीय सूत्रों और स्वास्थ्य विभाग से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं के बाद उन्हें आनन-फानन में राजधानी रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उपचार के लिए ले जाया गया. डॉक्टरों ने उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत सघन चिकित्सा इकाई (ICU) में स्थानांतरित कर दिया है, जहां उनका इलाज शुरू कर दिया गया है.
रायपुर एम्स प्रबंधन के मुताबिक, लोक कलाकार तीजन बाई की आयु और पुरानी बीमारियों के इतिहास को देखते हुए अस्पताल के वरिष्ठ और विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित की गई है. यह मेडिकल टीम लगातार उनके स्वास्थ्य मापदंडों की बारीकी से निगरानी (मॉनिटरिंग) कर रही है. उनके आईसीयू में भर्ती होने की खबर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर प्रसारित होते ही पूरे छत्तीसगढ़ सहित देश भर में मौजूद उनके लाखों प्रशंसकों, कला प्रेमियों और समर्थकों में चिंता की लहर दौड़ गई है. सभी लोग ईश्वर से उनके जल्द से जल्द पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थना और दुआएं कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि भारत की प्राचीन लोक कला की जीवंत प्रतीक और भारत सरकार द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म विभूषण’ से अलंकृत तीजन बाई पिछले काफी समय से वृद्धावस्था जनित गंभीर बीमारियों का सामना कर रही हैं. डॉक्टरों के अनुसार, वे पिछले लगभग तीन सालों से पैरालिसिस (लकवा) के असर और डिमेंशिया (याददाश्त खोने की बीमारी) से गंभीर रूप से पीड़ित हैं. इन बीमारियों के कारण उनका चलना-फिरना और सामान्य बातचीत करना पहले से ही काफी सीमित हो चुका था, और अब अचानक स्वास्थ्य गिरने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं.
यह पहली बार नहीं है जब तीजन बाई की सेहत को लेकर शीर्ष स्तर पर चिंता व्यक्त की गई हो. इससे पहले बीते वर्ष नवंबर महीने में भी उनकी तबीयत अचानक बहुत ज्यादा खराब हो गई थी, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ा था. उस दौरान कला जगत के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद तीजन बाई के परिजनों को फोन कॉल किया था. प्रधानमंत्री ने न सिर्फ उनके स्वास्थ्य का पूरा हालचाल जाना था, बल्कि उनके बेहतर इलाज के लिए हर संभव केंद्रीय सहायता और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का ठोस भरोसा भी दिया था.
तीजन बाई का नाम आते ही जेहन में हाथ में तंबूरा लिए और रौद्र रूप में महाभारत के प्रसंगों को सुनाती एक ओजस्वी महिला की छवि उभरती है. भिलाई के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई ने पारंपरिक रूप से पुरुषों के वर्चस्व वाले ‘कापालिक’ शैली में पंडवानी गायन कर समाज की रूढ़ियों को तोड़ा था. उन्होंने देश के ग्रामीण अंचलों से निकलकर पेरिस, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक मंचों पर अपनी कला का लोहा मनवाया. कला के क्षेत्र में उनके इसी अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्म श्री, पद्म भूषण और फिर पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. आज पूरा देश उनकी सेहत में सुधार की आस लगाए बैठा है.
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