Parliament session news : 21 जुलाई, सोमवार से संसद का मानसून सत्र आरंभ हो गया है, जो आगामी 21 अगस्त तक चलेगा। सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि “मानसून नवीनता और नवसृजन का प्रतीक है। यह कृषि के लिए लाभकारी है और इसी प्रकार संसद का यह सत्र भी देश के लिए गौरवपूर्ण साबित होगा।” उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरी तरह सफल रहा और आज भारत की जीत बम और बंदूक के जरिए नहीं बल्कि संविधान और लोकतंत्र के रास्ते हो रही है।
मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक पहले विपक्ष, खासतौर पर कांग्रेस, सरकार को घेरने की तैयारी में नजर आई। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि जब देश आतंकवाद और विदेश नीति से जुड़े गंभीर मसलों का सामना कर रहा हो, तो प्रधानमंत्री को सदन में उपस्थित रहकर अपना जवाब देना चाहिए। पार्टी ने साफ किया कि पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता वाले बयान जैसे मुद्दे जब चर्चा में आएंगे, तब पीएम की जवाबदेही सबसे जरूरी है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम मोदी के सत्र पूर्व संबोधन पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “कुछ ही देर में प्रधानमंत्री मीडिया के सामने वही घिसी-पिटी बातें दोहराएंगे। हर सत्र की शुरुआत में एक जैसे वाक्य, लेकिन असली मुद्दों पर चुप्पी।” उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी संसद में सालभर में केवल एक बार—राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान—बोलते हैं। “अब जब देश की सुरक्षा, विदेश नीति और आंतरिक मामलों पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, तो प्रधानमंत्री को अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए।”
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में संचालित “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को इस ऑपरेशन की सफलता और इससे जुड़े तथ्यों पर संसद में स्पष्ट बयान देना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा किए गए ‘सीजफायर’ और ‘मध्यस्थता’ के दावे भारत की संप्रभुता और सेना के सम्मान पर सवाल उठाते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की चुप्पी अस्वीकार्य है।
जयराम रमेश ने पीएम मोदी के आगामी ब्रिटेन और मालदीव दौरों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “48 घंटे बाद पीएम फिर एक विदेशी दौरे पर रवाना हो जाएंगे। वह एक ‘सुपर प्रीमियम फ्रीक्वेंट फ्लायर’ बन चुके हैं, जबकि मणिपुर जैसी संवेदनशील राज्य के लोग आज भी जवाब और राहत की उम्मीद में हैं।” उन्होंने कहा कि इस समय जब संसद सत्र चल रहा है और देश के सामने कई गंभीर मसले हैं, ऐसे में बार-बार विदेश जाना देशवासियों के साथ अन्याय है।
मानसून सत्र में विपक्ष ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर, डोनाल्ड ट्रंप का विवादित बयान, मणिपुर की स्थिति, और इनकम टैक्स अधिनियम जैसे विषयों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मांग है कि प्रधानमंत्री खुद इन मुद्दों पर संसद में बयान दें और चर्चा का सामना करें।
मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही संसद का माहौल गर्मा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ओर जहां सकारात्मक शुरुआत का संदेश दिया, वहीं विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी जवाबदेही तय करने की मांग की। आने वाले दिनों में यह सत्र न केवल विधायी कार्यों के लिहाज से बल्कि सियासी टकरावों के कारण भी काफी अहम साबित हो सकता है।
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