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Bihar election 2025: पवन सिंह के घरेलू विवाद ने राजनीति में भरी हलचल, ज्योति सिंह ने काराकाट से चुनाव लड़ने का किया एलान

Bihar Election 2025: भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह के घरेलू विवाद को लेकर अब राजनीति में भी तेज़ी से हलचल शुरू हो गई है। खासकर तब से जब उनके बीजेपी में वापसी का रास्ता साफ हुआ है, तब से भोजपुर, रोहतास, भभुआ, बक्सर और औरंगाबाद जैसे जिलों में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। राजपूत-कुशवाहा समीकरण पर छिड़े इस नए राजनीतिक संघर्ष ने बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।

राजद-कांग्रेस-भाकपा माले की नींद उड़ी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पवन सिंह की वापसी से राजद, कांग्रेस और भाकपा माले के लिए चिंता बढ़ गई है। इन पार्टियों को यह डर सता रहा है कि पवन सिंह की लोकप्रियता और राजपूत-कुशवाहा समीकरण की वजह से वे अपने पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने का खतरा महसूस कर रहे हैं। खासतौर पर इस क्षेत्र के राजपूत बहुल विधानसभा क्षेत्रों में यह टकराव और तेज हो गया है।

ज्योति सिंह का राजनीतिक सफर

पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने भी राजनीति में कदम रख दिया है। उन्होंने दावा किया है कि वे पिछले एक साल से राजद के संपर्क में हैं और अगस्त 2025 में उन्होंने काराकाट, नबीनगर और डिहरी में जनसंपर्क अभियान चलाया था। यह क्षेत्र राजपूत बहुल है और यहां की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। ज्योति ने खुद को इस क्षेत्र की बेटी बताया और लोगों से अपील की कि उन्हें सिर्फ पवन सिंह की पत्नी के रूप में न देखें। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर महिलाओं के बीच कई बैठकें कीं और अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की पूरी कोशिश की।

विवादों का इतिहास

पवन सिंह और ज्योति सिंह की शादी मार्च 2018 में हुई थी। शुरूआती दौर में दोनों का रिश्ता सामान्य था, लेकिन 2021 में ज्योति के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद रिश्तों में दरार आने लगी। इसके बाद घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के आरोप सामने आए। 2022 में पवन ने तलाक के लिए आरा कोर्ट में अर्जी दी, जबकि ज्योति ने बलिया कोर्ट में गुजारा भत्ता मांगा। ये विवाद अब राजनीतिक रंग लेने लगे हैं।

चुनावी संघर्ष और भविष्य की संभावनाएं

2024 में जब बीजेपी ने पवन सिंह को आसनसोल से उम्मीदवार बनाया था, तो तृणमूल कांग्रेस ने उनके पुराने गानों को वायरल कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की। विवाद के चलते उनका टिकट वापस ले लिया गया। इसके बाद पवन सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काराकाट से चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे, लगभग 2 लाख 74 हजार वोट हासिल किए।

अब ज्योति सिंह ने साफ कर दिया है कि अगर उन्हें काराकाट से टिकट मिलता है तो वे चुनाव लड़ेंगी। यह राजनीतिक जंग बिहार की आगामी विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पवन-ज्योति विवाद ने क्षेत्र की राजनीति को नए सिरे से सक्रिय कर दिया है और आने वाले दिनों में इसकी गूंज और बढ़ने की संभावना है।

पवन सिंह और ज्योति सिंह के विवाद ने भोजपुरी सिनेमा से राजनीति तक का सफर तय किया है। इस मामले में सिर्फ एक घरेलू विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरण भी गहराते जा रहे हैं। बिहार के राजपूत-कुशवाहा वोट बैंक के लिए यह संघर्ष अगले विधानसभा चुनावों में बड़े बदलाव का संकेत देता है। राजनीतिक दलों की रणनीतियां अब इसी हिसाब से बनेंगी, क्योंकि यह मामला स्थानीय राजनीति को काफी प्रभावित कर रहा है।

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