Health Tips
Health Tips: आजकल जैसे-जैसे लोग अपनी जीवनशैली को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं, वैसे-वैसे रसोई में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों में भी “फैंसी” और “प्रीमियम” उत्पादों का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। इन्हीं में से एक सबसे लोकप्रिय उत्पाद है ‘पिंक हिमालयन साल्ट’ यानी गुलाबी सेंधा नमक। कई लोगों का ऐसा मानना है कि यह नमक सामान्य सफेद नमक की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक है और इसमें प्रचुर मात्रा में मिनरल्स (खनिज) होते हैं। इसी विश्वास के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों से साधारण आयोडीन वाले नमक को हटाकर गुलाबी नमक को जगह दे दी है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव आपकी सेहत के लिए उतना फायदेमंद नहीं है जितना दिखाई देता है।
बेंगलुरु के प्रसिद्ध फिटनेस कोच राल्स्टन डिसूजा (Ralston D’Souza) ने 20 फरवरी को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर लोगों को इस विषय में आगाह किया है। उनके अनुसार, दैनिक जीवन में आयोडीन युक्त नमक को पूरी तरह से गैर-आयोडीन वाले गुलाबी नमक से बदलना सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। लोगों को लगता है कि गुलाबी नमक में अधिक खनिज तत्व हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसमें मौजूद ट्रेस मिनरल्स की मात्रा इतनी कम होती है कि वे शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकते। किसी भी वास्तविक पोषण लाभ के लिए आपको इस नमक का अत्यधिक सेवन करना होगा, जो उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों को दावत देने के बराबर है।
पिंक साल्ट न केवल पोषण के मामले में भ्रामक है, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी बोझिल है। बाजार में इसकी कीमत सामान्य आयोडीन युक्त नमक से लगभग दो से तीन गुना अधिक होती है। ऊँची कीमत चुकाने के बावजूद, उपभोक्ता उस सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व यानी ‘आयोडीन’ से वंचित रह जाता है, जो साधारण सफेद नमक में आसानी से उपलब्ध होता है। बिना आयोडीन वाले नमक का निरंतर सेवन शरीर के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकता है।
भारत में आयोडीन की कमी 1960 के दशक तक एक विकराल सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या थी। उस समय आयोडीन की कमी के कारण घेंघा (Goitre), थायरॉइड विकार, गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं और नवजात बच्चों में मानसिक व शारीरिक विकास रुकने जैसी बीमारियां आम थीं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए भारत सरकार ने नमक का ‘यूनिवर्सल आयोडीनीकरण’ अनिवार्य किया। इसके बाद ही आयोडीन से होने वाली बीमारियों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अब ट्रेंड के चक्कर में फिर से गैर-आयोडीन नमक की ओर लौटना इन गंभीर समस्याओं को वापस बुलाने जैसा हो सकता है।
आयोडीन हमारे शरीर के थायरॉइड फंक्शन को सुचारू रूप से चलाने के लिए अनिवार्य है। थायरॉइड ग्रंथियां मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाती हैं, जिनके निर्माण के लिए आयोडीन कच्चा माल होता है। यदि आप पिंक साल्ट का इस्तेमाल करते हैं जिसमें आयोडीन नहीं है, तो आप अनजाने में ‘हाइपोथायरायडिज्म’ (Hypothyroidism) और अन्य मेटाबॉलिक विकारों का जोखिम बढ़ा रहे हैं। विशेषकर गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों के लिए आयोडीन की कमी बहुत खतरनाक साबित हो सकती है।
सी-सॉल्ट या पिंक साल्ट जैसे विकल्प दिखने में आकर्षक और “नेचुरल” लग सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से साधारण आयोडीन युक्त नमक ही सबसे सस्ता, सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। विज्ञापन और डाइट ट्रेंड्स के कारण महंगे “फैंसी” साल्ट की ओर भागने के बजाय, अपनी थायरॉइड हेल्थ और संपूर्ण पोषण सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। याद रखें, हर चमकती चीज सोना नहीं होती और हर गुलाबी नमक सेहत के लिए “सुपरफूड” नहीं होता।
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