India US Trade Deal
India US Trade Deal: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को लोकसभा में भारत और अमेरिका के बीच संपन्न हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मेगा डील को अंतिम रूप देते समय भारत सरकार ने अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं किया है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद भारतीय वार्ताकार दल कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित करने में पूरी तरह सफल रहा है। यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार नीति में एक नए मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।
वाणिज्य मंत्री ने विशेष रूप से जोर देकर कहा कि इस समझौते में खाद्य और कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा गया है। पीयूष गोयल के अनुसार, “हमने यह सुनिश्चित किया है कि अमेरिकी उत्पादों के प्रवेश से हमारे स्थानीय किसानों और दुग्ध उत्पादकों के हितों को कोई आंच न आए।” अक्सर विदेशी व्यापार समझौतों में कृषि क्षेत्र को लेकर चिंताएं जताई जाती हैं, लेकिन गोयल ने सदन को आश्वस्त किया कि भारतीय पक्ष ने बातचीत के दौरान एक मजबूत रक्षात्मक रुख अपनाया, जिससे घरेलू बाजार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों सुरक्षित रहेंगे।
इस समझौते की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 2 फरवरी, 2026 को हुई महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत रही। इस चर्चा के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर लगाए जाने वाले टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का बड़ा निर्णय लिया। पीयूष गोयल ने बताया कि पहले अमेरिका भारतीय सामानों पर अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक शुल्क वसूल रहा था। अब इस कटौती से अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता (Export Competitiveness) बढ़ेगी। विशेष रूप से कपड़ा, रत्न-आभूषण और विनिर्माण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इससे सीधा लाभ मिलेगा।
पीयूष गोयल द्वारा साझा की गई जानकारी के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
यह समझौता भारत और अमेरिका दोनों राष्ट्रों के लिए आर्थिक रूप से ‘विन-विन’ स्थिति है।
भारतीय कृषि क्षेत्र के हितों की 100% सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
डेयरी सेक्टर को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
लगभग एक साल की गहन बातचीत के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई निजी बातचीत ने डील की राह आसान की।
भारतीय निर्यात पर अब टैरिफ घटाकर मात्र 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
यह समझौता भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी वैश्विक निर्यातक देशों के समकक्ष लाकर खड़ा कर देगा।
अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच अब पहले से कहीं अधिक सुलभ होगी।
मैन्युफैक्चरिंग और लेबर-इंटेंसिव सेक्टर में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद समझौते का पूर्ण दस्तावेजी विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।
भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश ने पिछले 6 वर्षों में कुल 9 व्यापार समझौते सफलतापूर्वक संपन्न किए हैं। अमेरिका के साथ हुई यह डील इस साल की दूसरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। इससे पहले भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा की थी। भारत की सक्रिय विदेश व्यापार नीति के तहत साल 2025 में ओमान, न्यूजीलैंड और यूके के साथ समझौते हुए, जबकि 2024 में EFTA, 2022 में ऑस्ट्रेलिया एवं यूएई और 2021 में मॉरीशस के साथ व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई मिली।
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