Nepal crisis: नेपाल में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने विकराल रूप ले लिया है। इस बीच नेपाली मीडिया ने सनसनीखेज दावा किया है कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को एक हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके साथ 7 वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद थे।

देशभर में जारी जनविद्रोह और हिंसक प्रदर्शन के बीच यह कदम उठाया गया है। प्रदर्शनकारी अब तक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के निजी आवासों को आग के हवाले कर चुके हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा हुआ है।

हिंसा और अराजकता चरम पर
नेपाल में बीते दो दिनों से सरकार के खिलाफ #GenZProtest के तहत देशव्यापी आंदोलन चल रहा है। काठमांडू समेत कई प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों, वाहनों और नेताओं के घरों पर हमला किया है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
पीएम ओली और मंत्रियों को कहां ले जाया गया?
हालांकि नेपाली सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना के एक विशेष हेलीकॉप्टर ने पीएम ओली और अन्य मंत्रियों को लेकर काठमांडू के एक अज्ञात स्थान के लिए उड़ान भरी। संभावना जताई जा रही है कि उन्हें देश के पश्चिमी या दक्षिणी क्षेत्र में किसी सुरक्षित सैन्य बेस पर शिफ्ट किया गया है।
साथ कौन-कौन मंत्री थे?
सूत्रों के अनुसार, हेलीकॉप्टर में जिन मंत्रियों को साथ ले जाया गया, उनमें शामिल हो सकते हैं: गृहमंत्री रमेश लेखक (हालांकि उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था)
विदेश मंत्री डॉ. आरजू राणा देउबा
संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग
ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का
पर्यटन मंत्री बद्री पांडे
उपप्रधानमंत्री प्रकाश मान सिंह
कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी
(सरकारी पुष्टि अभी लंबित है)
जनता का आक्रोश क्यों?
इस आंदोलन की जड़ में है:
भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का आरोप
बेरोजगारी और महंगाई से त्रस्त युवा वर्ग
हाल ही में लगाया गया सोशल मीडिया बैन, जो बाद में वापस लिया गया
इन सभी कारणों ने मिलकर जनता, खासकर युवा वर्ग को बगावत पर मजबूर कर दिया।
राजनीतिक संकट और अनिश्चितता
नेपाली कांग्रेस के सभी मंत्रियों ने पहले ही इस्तीफा दे दिया है, जिससे गठबंधन सरकार पर संकट और गहरा गया है। अगर पीएम ओली ने वाकई देश छोड़ने या इस्तीफे की योजना बनाई है, तो यह नेपाल में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत हो सकती है। अगर नेपाली मीडिया के दावे सही साबित होते हैं, तो यह स्पष्ट है कि नेपाल में राजनीतिक और संवैधानिक संकट चरम पर है। देश की जनता परिवर्तन चाहती है और अब सरकार के पास विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।










