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Rakesh Tikait News : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नागरिकों से आर्थिक और पर्यावरणीय सुरक्षा को लेकर तीन महत्वपूर्ण अपीलें की थीं। पीएम ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, सोने में निवेश कम करने और किसानों से रासायनिक खाद त्यागकर जैविक खेती (Organic Farming) अपनाने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री की इस पहल को अब अप्रत्याशित रूप से किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरे और भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत का भी साथ मिल गया है। टिकैत ने कहा कि जब देश किसी चुनौती या मुश्किल दौर से गुजर रहा हो, तो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी को राष्ट्रहित में एकजुट होना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सोने की खरीद कम करने की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए राकेश टिकैत ने इसे खाप पंचायतों की विचारधारा से जोड़ा। मुजफ्फरनगर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी खाप पंचायतें हमेशा से ही सामाजिक जीवन में सादगी और फिजूलखर्ची रोकने की वकालत करती रही हैं। टिकैत ने एक कदम आगे बढ़ते हुए सुझाव दिया कि सरकार को शादियों में सोने के आभूषणों के इस्तेमाल की एक सीमा तय करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इस पर कोई कानून बनता है, तो इससे न केवल मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी बचेगा।
जैविक खेती को लेकर प्रधानमंत्री की अपील का स्वागत करते हुए टिकैत ने सरकार के सामने कुछ बुनियादी सवाल भी रखे। उन्होंने कहा कि किसान संगठन वर्षों से ऑर्गेनिक खेती की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए ठोस सरकारी ढांचे की कमी है। टिकैत ने मांग उठाई कि फर्टिलाइजर पर दी जाने वाली हजारों करोड़ की सब्सिडी सीधे कंपनियों को देने के बजाय किसानों के बैंक खातों में उनकी जमीन के रकबे के हिसाब से दी जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब किसान के हाथ में पैसा होगा, तभी वह जैविक खाद और महंगे जैविक इनपुट्स खरीदने में सक्षम हो पाएगा।
टिकैत ने जैविक खेती को सफल बनाने के लिए ‘मार्केट एक्सेस’ पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल अपील करने से किसान जैविक खेती नहीं अपनाएगा, बल्कि उसे अपने उत्पाद बेचने के लिए विशेष बाजार चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बड़े शहरों और आलीशान मॉल्स में किसानों को सस्ती दरों पर दुकानें या आउटलेट्स उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसके अलावा, ऑर्गेनिक उत्पादों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम और लैब टेस्टिंग की सुविधा होनी चाहिए, ताकि ग्राहकों का भरोसा बढ़े और मिलावटखोरी पर लगाम लगाई जा सके।
पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के मुद्दे पर बीकेयू नेता ने सरकार को आईना भी दिखाया। उन्होंने कहा कि लोग ईंधन तभी बचा पाएंगे जब उन्हें सार्वजनिक परिवहन का बेहतर विकल्प मिलेगा। टिकैत ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय में कई महत्वपूर्ण लोकल ट्रेनें बंद कर दी गई हैं, जिसके कारण आम आदमी मजबूरी में मोटरसाइकिल या निजी वाहनों का उपयोग कर रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार यदि बंद पड़ी पैसेंजर और लोकल ट्रेनों को फिर से शुरू करे और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाए, तो देश में ईंधन की खपत को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
राकेश टिकैत का यह रुख काफी सकारात्मक माना जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि देश की आर्थिक मजबूती के लिए संसाधनों का सही प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की बचत व्यक्तिगत स्तर पर भी की जानी चाहिए और जितना संभव हो, गैर-जरूरी यात्राओं से बचना चाहिए। टिकैत का मानना है कि प्रधानमंत्री की इन अपीलों को यदि जमीनी स्तर पर सही नीतियों के साथ लागू किया जाए, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। फिलहाल, टिकैत के इन सुझावों और मोदी की अपील के समन्वय ने राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है।
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