Bloomberg Economic Forum : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक फोरम में दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों, कारोबारियों, उद्योग जगत के नेताओं और नीति निर्माताओं का भारत में स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंच विभिन्न देशों के विचारों और अनुभवों को साझा करने का अवसर देते हैं। प्रधानमंत्री ने माइकल ब्लूमबर्ग और उनकी टीम को पहली बार इस फोरम का आयोजन भारत में करने के फैसले के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत को इस आयोजन के लिए चुनना सही समय पर सही जगह चुनने जैसा है।
दुनिया के बेहतरीन दिमागों को जोड़ता है फोरम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक फोरम हर साल दुनिया के प्रमुख विचारकों, विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाता है। यहां अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक मामलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विचारों का आदान-प्रदान बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण है। भारत में पहली बार इस आयोजन का होना देश की बढ़ती भूमिका और वैश्विक विमर्श में उसकी भागीदारी को रेखांकित करता है।
नई वैश्विक ताकतों पर केंद्रित है इस साल की थीम
प्रधानमंत्री ने फोरम की इस वर्ष की थीम का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में शक्ति के स्वरूप और उसके स्रोत तेजी से बदल रहे हैं। इतिहास के हर दौर में ताकत की अलग-अलग परिभाषाएं रही हैं। कभी संसाधन, औद्योगिक क्षमता और आर्थिक प्रभाव किसी देश की शक्ति का आधार माने जाते थे, लेकिन 21वीं सदी में इन धारणाओं में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। खासकर मौजूदा दशक में तकनीकी विकास और ज्ञान की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
टेक्नोलॉजी, डेटा और नॉलेज हैं नई ताकत
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार को आधुनिक युग की प्रमुख शक्तियां बताया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में तकनीकी क्षमता और नए विचार आर्थिक विकास तथा सामाजिक बदलाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। डेटा का उपयोग, ज्ञान का विस्तार और नई तकनीकों का विकास देशों और कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं। ऐसे में इन संसाधनों तक पहुंच और उनका प्रभावी इस्तेमाल भविष्य की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है।
असली सवाल ताकत नहीं, उसके इस्तेमाल का है
प्रधानमंत्री ने कहा कि महत्वपूर्ण सवाल केवल यह नहीं है कि तकनीक, डेटा और ज्ञान किसके पास मौजूद हैं, बल्कि यह भी है कि उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने इस विषय पर विचार रखने को कहा कि क्या नई तकनीक का लाभ केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहेगा या इससे करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इसी तरह, ज्ञान क्या सीमित वर्ग की ताकत बना रहेगा या समाज के अधिक लोगों की क्षमताओं को बढ़ाने का माध्यम बनेगा?
समावेशी विकास और अवसरों पर जोर
प्रधानमंत्री के संबोधन का केंद्रीय संदेश यह रहा कि आधुनिक संसाधनों की वास्तविक उपयोगिता उनके व्यापक सामाजिक लाभ में है। तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल तभी अधिक प्रभावी माना जा सकता है, जब वे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं और विकास के नए रास्ते खोलें। वैश्विक मंच पर दिया गया यह संदेश भारत की तकनीकी प्रगति, आर्थिक अवसरों और समावेशी विकास से जुड़ी व्यापक चर्चा को सामने लाता है।
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