Surguja Python Rescue : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से वन्यजीव संरक्षण और चिकित्सा से जुड़ी एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। अंबिकापुर में रेस्क्यू किए गए एक इंडियन रॉक पाइथन यानी भारतीय अजगर के मुंह में गंभीर ट्यूमर की गांठ थी। इस गांठ के कारण वह भोजन निगलने में असमर्थ था और उसकी जान पर खतरा मंडरा रहा था। ऐसे मुश्किल समय में सरगुजा के स्नेकमैन सत्यम द्विवेदी ने उसकी तकलीफ को पहचाना और बेहतर इलाज के लिए करीब 250 किलोमीटर का सफर तय किया।
विश्वकर्मा मंदिर के पीछे मिला बीमार अजगर
करीब एक सप्ताह पहले अंबिकापुर के विश्वकर्मा मंदिर के पीछे इस अजगर को रेस्क्यू किया गया था। शुरुआत में उसके मुंह में सूजन देखकर लगा कि शायद उसने कोई बड़ा शिकार निगल लिया है। हालांकि, सांपों के व्यवहार और उनकी शारीरिक स्थिति की जानकारी रखने वाले सत्यम द्विवेदी ने जब बारीकी से जांच की, तो उन्हें मुंह के अंदर असामान्य गांठें दिखाई दीं। अजगर की हालत देखकर अंदाजा हुआ कि वह सामान्य तरीके से भोजन नहीं कर पा रहा था।
वन विभाग की अनुमति के बाद बिलासपुर ले जाने का फैसला
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सत्यम ने तत्काल सरगुजा वन विभाग से संपर्क किया और आवश्यक अनुमति प्राप्त की। इसके बाद अजगर को बेहतर उपचार दिलाने के लिए बिलासपुर ले जाने का निर्णय लिया गया। यह यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की कोशिश नहीं थी, बल्कि एक बेजुबान वन्यजीव की जान बचाने का प्रयास था। लगभग 8.5 किलोग्राम वजनी इस अजगर को विशेषज्ञों की देखरेख में इलाज के लिए पहुंचाया गया।
कानन पेंडारी के विशेषज्ञ ने किया रेफर
बिलासपुर पहुंचने पर कानन पेंडारी के उप संचालक और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. पीके चंदन ने अजगर की जांच की। मुंह में मौजूद गांठ की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने उसे आगे के उपचार के लिए पेट मेडिक्स के संचालक डॉ. पीयूष दुबे के पास रेफर किया। इसके बाद अजगर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सर्जरी की तैयारी की गई, ताकि मुंह के भीतर मौजूद गांठ को निकालकर उसे दोबारा भोजन करने योग्य बनाया जा सके।
साढ़े तीन घंटे तक चली जटिल सर्जरी
डॉ. पीयूष दुबे और उनकी टीम ने आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की मदद से अजगर की सर्जरी की। करीब साढ़े तीन घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन में उसके मुंह के भीतर मौजूद ट्यूमर की गांठ को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। उपचार से जुड़े विवरणों के अनुसार, गांठ काफी बड़ी थी और अजगर के लिए सामान्य रूप से भोजन करना मुश्किल हो गया था। ऑपरेशन के बाद उसकी हालत को देखते हुए उसे ड्रिप और विशेष चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।
आईसीयू और आधुनिक मशीनों से मिल रही देखभाल
सर्जरी के बाद अजगर को बेहतर स्वास्थ्य लाभ देने के लिए आईसीयू सपोर्ट, वेंटिलेटर और अन्य आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की सहायता ली जा रही है। चिकित्सकों की टीम उसकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। शुरुआती उपचार में मिली सफलता ने वन्यजीव प्रेमियों और सरीसृपों के इलाज से जुड़े लोगों के बीच उम्मीद जगाई है। हालांकि, पूरी तरह स्वस्थ होने और प्राकृतिक परिवेश में छोड़े जाने से पहले उसकी निरंतर निगरानी जरूरी होगी।
स्नेकमैन सत्यम द्विवेदी के प्रयासों की हो रही चर्चा
इस पूरे बचाव अभियान में सत्यम द्विवेदी की भूमिका अहम रही। सरगुजा में सांपों और दूसरे वन्यजीवों को रेस्क्यू करने के लिए सक्रिय सत्यम को लोग ‘स्नेकमैन ऑफ सरगुजा’ के नाम से जानते हैं। इस बार उन्होंने केवल अजगर को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने तक अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी, बल्कि उपचार की प्रक्रिया में भी साथ बने हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, वह अभी बिलासपुर में रहकर अजगर की देखभाल कर रहे हैं।
स्वस्थ होने के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा अजगर
इस मामले को सरीसृपों की चिकित्सा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। अजगर के ट्यूमर को सर्जरी से निकालना उपचार की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। इसे कैंसर के सर्जिकल उपचार का पहला मामला बताने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता अजगर को पूरी तरह स्वस्थ करना है। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद विशेषज्ञों की सलाह और वन विभाग की प्रक्रिया के अनुसार उसे सुरक्षित प्राकृतिक परिवेश में छोड़े जाने की योजना है।
Read More : Bloomberg Economic Forum : पीएम मोदी ने दुनिया को दिया नई ताकत का संदेश, आखिर तकनीक और डेटा क्यों हैं अहम?