PM Modi-Koizumi Meet: भारत और जापान के बीच रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक को भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जापानी कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ से जुड़ने का न्योता
प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी रक्षा उद्योग को भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल से जुड़ने का सीधा निमंत्रण दिया। उन्होंने जापानी कंपनियों से भारतीय रक्षा कंपनियों और तेजी से उभर रहे डिफेंस स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर दिया, ताकि दोनों देशों की तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।
रक्षा सहयोग को लेकर पीएम मोदी ने जताई संतुष्टि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जापानी रक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने बातचीत को बेहद फलदायी बताया। पीएम मोदी के अनुसार, भारत और जापान की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ-साथ उससे आगे भी शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दोनों देशों के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग इसी व्यापक रणनीतिक संबंध का हिस्सा है।
राजनाथ सिंह और शिंजीरो कोइजुमी के बीच भी हुई वार्ता
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बैठक में दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर अपने सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन और नियम आधारित व्यवस्था को बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटने की जरूरत पर जोर दिया।
समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौता अहम कदम
भारत और जापान के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन हुआ। इसके तहत भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच सहयोग को बढ़ाया जाएगा। दोनों पक्ष सूचना साझा करने, सर्च एंड रेस्क्यू यानी SAR अभियानों और मानवीय सहायता से जुड़े मिशनों में बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे। यह समझौता दोनों देशों की समुद्री सुरक्षा साझेदारी को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
धर्म गार्जियन और जिमेक्स अभ्यास होंगे और व्यापक
दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यासों के विस्तार का भी स्वागत किया। इनमें थलसेना का ‘धर्म गार्जियन’ और नौसेना का समुद्री अभ्यास ‘जिमेक्स’ यानी JIMEX शामिल है। इन अभ्यासों के जरिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल, संचालन क्षमता और आपसी समझ को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की सुरक्षा साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।
पहली बार भारत आएंगे जापानी फाइटर जेट
आगामी वायुसेना अभ्यास ‘वीर गार्जियन 26’ को भी खास महत्व दिया जा रहा है। इस अभ्यास में जापानी वायुसेना के फाइटर जेट पहली बार भारत आकर हिस्सा लेंगे। इससे दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच परिचालन सहयोग और संयुक्त अभ्यास की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। रक्षा क्षेत्र में बढ़ता यह सहयोग दोनों देशों के बीच भरोसे को भी मजबूत करेगा।
उन्नत तकनीक और जहाज निर्माण पर बढ़ेगा सहयोग
बैठक के दौरान दोनों देशों ने उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके अलावा नौसेना के जहाज निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत और जापान ने ‘यूनिकॉर्न’ यानी UNICORN एंटीना सिस्टम प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने की दिशा में भी काम तेज करने पर सहमति व्यक्त की। इससे दोनों देशों की रक्षा तकनीकी साझेदारी को और गति मिलने की उम्मीद है।
हिंद-प्रशांत में मजबूत हो रही भारत-जापान साझेदारी
भारत और जापान के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा, सैन्य अभ्यास और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में सहयोग से दोनों देश अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं। साथ ही, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और स्वतंत्र नौवहन को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों की साझेदारी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
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