India Malaysia defense
India Malaysia defense : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मलेशिया यात्रा ने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को एक नई रणनीतिक ऊंचाई प्रदान की है। कुआलालंपुर में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और मलेशिया की साझेदारी महज कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक विरासत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा और सुरक्षा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी एक-दूसरे के पूरक बन रहे हैं। यह यात्रा वैश्विक राजनीति के बदलते परिदृश्य में दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को और मजबूती प्रदान करने वाली साबित हुई है।
आधुनिक युग की जरूरतों को देखते हुए, दोनों देशों ने अपने सहयोग के दायरे का विस्तार किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि आज भारत और मलेशिया कृषि और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के उद्योगों में भी हाथ मिला रहे हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत स्वयं को एक वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है और मलेशिया इस उद्योग में एक स्थापित शक्ति है। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास और क्षमता निर्माण में भी दोनों देश एक-दूसरे के अनुभव साझा कर रहे हैं, जो युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
मलेशियाई नेतृत्व के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को संबंधों का मुख्य स्तंभ बताया। उन्होंने मलेशिया द्वारा आसियान (ASEAN) की सफल अध्यक्षता की सराहना करते हुए कहा कि मलेशिया के सहयोग से भारत के आसियान देशों के साथ संबंध और अधिक व्यापक और गहरे होंगे। क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों का एक साथ आना इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। आतंकवाद विरोधी अभियान और सैन्य प्रशिक्षण में भी दोनों देशों की सेनाएं अब पहले से कहीं अधिक समन्वय के साथ काम कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक भावुक और महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला— ‘पीपुल टू पीपुल’ कनेक्शन। उन्होंने कहा कि मलेशिया में रहने वाले लगभग 30 लाख भारतीय मूल के नागरिक दोनों देशों के बीच एक ‘जीवंत सेतु’ (Living Bridge) की तरह हैं। यह प्रवासी समुदाय न केवल मलेशिया की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों को वहां जीवंत रखते हुए दोनों देशों के दिलों को जोड़ने का काम भी कर रहा है। पीएम मोदी ने मलेशियाई सरकार द्वारा किए गए भव्य और पारंपरिक स्वागत के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मलेशियाई जीवन की खूबसूरती को जिस तरह से प्रस्तुत किया गया, वह हमेशा स्मरणीय रहेगा।
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए इस यात्रा को अपने लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत के साथ बेहतर संबंध स्थापित करना मलेशिया की प्राथमिकता है। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कुछ चिंताजनक मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिनके समाधान के लिए दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपनी-अपनी टीमों को निर्देशित किया है। अनवर इब्राहिम ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में डिजिटल अर्थव्यवस्था, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग और अधिक बढ़ेगा, जिससे दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच विकास की नई गाथा लिखी जाएगी।
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