PM Modi Mann Ki Baat
PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, रविवार को देशवासियों को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 128वें एपिसोड के माध्यम से संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि नवंबर का महीना देश के लिए कई महत्वपूर्ण प्रेरणाएँ लेकर आया। उन्होंने हाल ही की बड़ी घटनाओं का उल्लेख किया, जैसे:26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ पर सेंट्रल हॉल में विशेष कार्यक्रम का आयोजन।वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में कार्यक्रमों की शानदार शुरुआत।25 नवंबर को अयोध्या में राम मंदिर पर धर्मध्वजा का आरोहण। इसी दिन कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में पाँचजन्य स्मारक का लोकार्पण।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय विकास की चर्चा करते हुए कहा, “कुछ दिन पहले ही मैंने हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीप इंजन MRO facility का उद्घाटन किया है। यह ‘Aircrafts की Maintenance, Repair and Overhaul’ के सेक्टर में भारत द्वारा उठाया गया एक बहुत बड़ा कदम है।” उन्होंने पिछले हफ्ते मुंबई में INS ‘माहे’ को भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने और Skyroot के ‘Infinity Campus’ द्वारा भारत के Space Ecosystem को नई उड़ान दिए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सभी उपलब्धियाँ भारत की नई सोच, इनोवेशन और यूथ पावर का प्रतिबिंब हैं।
पीएम मोदी ने बताया कि देश ने कृषि क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा, “भारत ने 357 मिलियन टन के खाद्यान्न उत्पादन के साथ एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। 357 मिलियन टन!” उन्होंने रेखांकित किया कि यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि 10 साल पहले की तुलना में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 100 मिलियन टन और बढ़ गया है।खेलों की दुनिया की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां भी भारत का परचम लहराया है। कुछ दिन पहले ही भारत को कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी मिलने का ऐलान हुआ है। उन्होंने इन उपलब्धियों को देशवासियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देश के युवा, खासकर Gen-Z (जनरेशन ज़ी) की तकनीकी क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर ISRO की एक अनोखी ड्रोन प्रतियोगिता के वीडियो ने मेरा ध्यान खींचा।”इस वीडियो में देश के युवा मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की कोशिश कर रहे थे। पीएम ने बताया कि ड्रोन उड़ते थे, कुछ पल संतुलन में रहते थे, और फिर अचानक जमीन पर गिर पड़ते थे। ऐसा क्यों हो रहा था? क्योंकि इन ड्रोन्स में GPS का सपोर्ट बिल्कुल नहीं था।
पीएम मोदी ने इस चुनौती को समझाते हुए कहा कि मंगल ग्रह पर GPS संभव नहीं है, इसलिए ड्रोन को कोई बाहरी संकेत या गाइडेंस नहीं मिल सकता था। ड्रोन को केवल अपने कैमरे और इनबिल्ट सॉफ्टवेयर के सहारे उड़ना था।इस छोटे-से ड्रोन को सतह के पैटर्न पहचानने थे, ऊंचाई मापनी थी, बाधाओं को समझना था, और खुद ही सुरक्षित उतरने का रास्ता ढूंढना था। यही कारण था कि अभ्यास के दौरान ड्रोन बार-बार गिर रहे थे।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस कठिन प्रतियोगिता में पुणे के युवाओं की एक टीम ने कुछ हद तक सफलता पाई। उन्होंने कहा कि उनका ड्रोन भी कई बार गिरा और क्रैश हुआ, “पर उन्होंने हार नहीं मानी।”लगातार कई प्रयासों के बाद, इस टीम का ड्रोन मंगल ग्रह जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में कुछ देर उड़ने में कामयाब रहा। पीएम ने इस प्रयास को युवा शक्ति के दृढ़ संकल्प और नवाचार की भावना का प्रतीक बताया।
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