Monsoon Curd Rules: आयुर्वेद में आहार को ऋतुओं के अनुसार ग्रहण करने पर विशेष जोर दिया गया है। ‘चरकसंहिता’ के अनुसार, वर्ष की तीन प्रमुख ऋतुओं—शरद, ग्रीष्म और वसंत में दही का सेवन वर्जित माना गया है। आमतौर पर दही की तासीर गर्म होती है, लेकिन जब इसे पानी के साथ मिलाकर मट्ठा या छाछ बना लिया जाता है, तो यह पेट के लिए शीतलता प्रदान करने वाला होता है। यह पाचन में हल्का होता है और शरीर में डिहाइड्रेशन को रोकता है। हालांकि, मानसून के दौरान दही के सेवन को लेकर अक्सर दुविधा बनी रहती है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में दही खाना स्वास्थ्य के लिए उचित है या नहीं और आयुर्वेद इस पर क्या कहता है।

मानसून में पाचन शक्ति और दही का प्रभाव
आशा आयुर्वेदा की विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, मानसून के दौरान हमारी पाचन अग्नि (पाचन शक्ति) स्वाभाविक रूप से काफी कमजोर हो जाती है। इस मौसम में बहुत अधिक ठंडा और भारी दही खाने से पेट में गैस, ब्लोटिंग और शरीर में कफ दोष बढ़ने की समस्या हो सकती है। दही की प्रकृति अम्लीय (एसिडिक) होती है, और यदि इसे सही तरीके से न खाया जाए, तो यह रक्त की अशुद्धियों का कारण भी बन सकता है। विशेष रूप से रात के समय दही का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह बलगम (म्यूकस) के निर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे गले में खराश और जुकाम की समस्या हो सकती है।

दही खाने के स्वास्थ्य लाभ
दही एक प्रोबायोटिक सुपरफूड है, जो उचित मात्रा में लेने पर अनेक लाभ प्रदान करता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ-साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को भी बेहतर करता है। दही कैल्शियम का समृद्ध स्रोत है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, सीमित मात्रा में दही का नियमित सेवन मेटाबॉलिज्म को सुचारू रखकर वजन को नियंत्रित रखने में भी सहायक सिद्ध होता है।
बरसात में दही के सेवन से होने वाले नुकसान
आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, मानसून में दही का अत्यधिक सेवन करने से शरीर में वात और कफ असंतुलित हो सकते हैं। इससे एसिडिटी, त्वचा संबंधी विकार और पाचन तंत्र की कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। चूँकि इस मौसम में चयापचय (मेटाबॉलिज्म) की दर धीमी हो जाती है, इसलिए दही जैसे देर से पचने वाले आहार का सेवन अपच का कारण बन सकता है। यदि आप पहले से ही पाचन संबंधी समस्याओं या अपच से जूझ रहे हैं, तो मानसून के दौरान दही से पूरी तरह दूरी बनाना ही बेहतर विकल्प है।
मानसून में दही खाने का सही तरीका
यदि आप मानसून के दौरान दही का सेवन करना चाहते हैं, तो इसे सही तरीके और सीमित मात्रा में ही लें। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में दही में थोड़ी सी चीनी, घी या आंवला मिलाकर सेवन करना इसके प्रतिकूल प्रभावों को कम करता है। इसे सीधे फ्रिज से निकालकर न खाएं; पहले इसे सामान्य तापमान पर आने दें। दही को अधिक सुपाच्य बनाने के लिए उसमें थोड़ा भुना हुआ जीरा पाउडर और काला नमक मिलाएं। याद रखें कि मानसून में हमेशा हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन ही ग्रहण करना चाहिए, ताकि आपकी पाचन अग्नि सुरक्षित रहे।
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