PM Modi Post Row: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता तेजिंदर सिंह बग्गा ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा (फेसबुक) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई से जुड़ी फेसबुक पोस्ट भारत में दिखाई नहीं जा रही है। बग्गा के अनुसार यह केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक ऐसा मामला है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल प्लेटफॉर्म की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी विदेशी सोशल मीडिया कंपनी ने वास्तव में प्रधानमंत्री की पोस्ट को भारत में सीमित किया है, तो इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

एक्स पर पोस्ट कर मेटा की भूमिका पर उठाए सवाल
मंगलवार को तेजिंदर सिंह बग्गा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि फेसबुक ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट को भारत में देखने से रोक दिया है। बग्गा ने सवाल किया कि आखिर किसके निर्देश पर एक विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत के प्रधानमंत्री की पोस्ट को सीमित कर सकता है। उन्होंने कहा कि किसी निजी कंपनी को यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि भारतीय नागरिक कौन-सी जानकारी देखें और कौन-सी नहीं।

डिजिटल संप्रभुता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उठाया मुद्दा
बीजेपी नेता ने इस पूरे मामले को केवल कंटेंट मॉडरेशन का विषय मानने से इनकार किया। उनका कहना है कि यदि किसी सरकारी आदेश या कानूनी प्रक्रिया के बिना ऐसा कदम उठाया गया है, तो यह भारत की डिजिटल संप्रभुता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में हस्तक्षेप माना जा सकता है। बग्गा ने कहा कि विदेशी तकनीकी कंपनियों को भारत के कानूनों और नागरिकों के सूचना के अधिकार का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
मेटा से सार्वजनिक जवाब की मांग
तेजिंदर सिंह बग्गा ने मेटा से इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने पूछा कि यदि पोस्ट को वास्तव में भारत में सीमित किया गया है, तो यह किस कानूनी अनुरोध या नियम के तहत किया गया। उन्होंने कहा कि मेटा को देश की जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि उसने किस आधार पर यह निर्णय लिया। अपने दावे के समर्थन में बग्गा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संबंधित पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसे उन्होंने एक्स पर पोस्ट के साथ संलग्न किया।
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पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ा राजनीतिक माहौल
नीट प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों में युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करते हुए प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग भी उठाई। लंबे समय तक चले आंदोलन के बाद उन्होंने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों की कुछ प्रमुख मांगों को स्वीकार करने की घोषणा भी की।
संसद में पेश हुआ पेपर लीक रोकने वाला संशोधन विधेयक
पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार अब संसद में नया संशोधन विधेयक लेकर आई है। सोमवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया। सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच विधेयक पेश किया गया, जबकि सत्तापक्ष के सांसदों ने मेज थपथपाकर इसका समर्थन किया। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सोशल मीडिया की भूमिका पर फिर शुरू हुई बहस
बग्गा के आरोपों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निष्पक्षता, कंटेंट मॉडरेशन और डिजिटल जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। यदि किसी पोस्ट की दृश्यता सीमित की जाती है, तो उसके पीछे के कारणों की पारदर्शिता महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहीं, सरकार द्वारा पेपर लीक के खिलाफ नए कानून लाने की पहल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाए गए आरोपों ने इस मुद्दे को राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मेटा इस मामले में क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है।
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