Putin Birthday Wishes Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से टेलीफोन पर बातचीत कर उन्हें 73वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन के अच्छे स्वास्थ्य और उनके सभी प्रयासों में सफलता की कामना की। दोनों नेताओं ने इस अवसर पर भारत-रूस के बीच प्रगति कर रहे द्विपक्षीय एजेंडे की समीक्षा की और आपसी सहयोग को और गहरा करने के संकल्प को दोहराया।

रणनीतिक साझेदारी को दी नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस के बीच “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग सहित कई क्षेत्रों में चल रही साझेदारियों की समीक्षा की और निकट भविष्य में इन्हें और आगे बढ़ाने के प्रयासों पर सहमति जताई।

भारत आने का निमंत्रण
पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को भारत दौरे का आमंत्रण देते हुए कहा कि वे उन्हें 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत में स्वागत करने को उत्सुक हैं। यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा करने और नए समझौतों की नींव रखने का एक अहम अवसर साबित हो सकता है।
पुतिन ने भी दी थी शुभकामनाएं
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 17 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी के 75वें जन्मदिन के अवसर पर राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें फोन कर शुभकामनाएं दी थीं। इस पर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर धन्यवाद देते हुए लिखा था कि, “हम अपनी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत, यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हरसंभव योगदान देने को तैयार है।”
पुतिन का जीवन परिचय
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का जन्म 7 अक्टूबर 1952 को तत्कालीन सोवियत संघ के लेनिनग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में हुआ था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह शहर नाजी जर्मनी की भीषण घेराबंदी का शिकार बना था। इस युद्ध का प्रभाव पुतिन के परिवार पर भी पड़ा, जिसमें उनके पिता और माता दोनों को गंभीर नुकसान झेलना पड़ा। पुतिन ने KGB अधिकारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और बाद में रूस की राजनीति में शीर्ष पर पहुंचे।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई यह बातचीत केवल औपचारिक शुभकामनाओं का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भारत-रूस के गहरे और बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और मजबूत कदम है। आने वाले शिखर सम्मेलन से द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।











