PM House Slum
PM House Slum: देश की राजधानी दिल्ली के सबसे सुरक्षित और वीआईपी माने जाने वाले इलाके, लोक कल्याण मार्ग पर स्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के पास बसी झुग्गियों को लेकर सियासत और मानवीय संवेदनाओं का दौर शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने सुरक्षा और सौंदर्यकरण के मद्देनजर इन झुग्गियों को खाली करने का सख्त नोटिस जारी किया है। इस आदेश के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। नोटिस के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित तीन प्रमुख झुग्गी बस्तियों—भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और DID कैंप—में रहने वाले 717 परिवारों को 6 मार्च 2026 तक अपने आशियाने खाली करने होंगे।
केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय के अधीन आने वाले ‘भूमि एवं विकास कार्यालय’ (L&DO) ने यह नोटिस चस्पा किया है। इसमें साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित तिथि यानी 6 मार्च तक झुग्गियों को खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा और संबंधित निवासियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने इन परिवारों को बेघर न करने का आश्वासन देते हुए उनके पुनर्वास की योजना भी पेश की है, लेकिन इस योजना को लेकर स्थानीय निवासियों में गहरा असंतोष और डर व्याप्त है।
सरकार का कहना है कि इन परिवारों को सड़क पर नहीं छोड़ा जाएगा और उनके लिए पक्के फ्लैटों का इंतजाम कर दिया गया है। पेच यह है कि ये फ्लैट दिल्ली के बाहरी इलाके ‘सावदा घेवरा’ में आवंटित किए गए हैं, जो वर्तमान जगह (लोक कल्याण मार्ग) से लगभग 45 किलोमीटर दूर है। झुग्गी निवासियों का सबसे बड़ा एतराज इसी दूरी को लेकर है। उनका कहना है कि वे दशकों से मध्य दिल्ली के इस इलाके में मजदूरी, घरेलू काम और छोटे-मोटे व्यापार करके अपना पेट पाल रहे हैं। इतनी दूर विस्थापित होने के बाद उनकी रोजी-रोटी पूरी तरह छिन जाएगी, क्योंकि हर रोज 45 किलोमीटर का सफर तय करना उनके लिए आर्थिक और शारीरिक रूप से असंभव है।
यह पहली बार नहीं है जब इन गरीब परिवारों पर बेदखली की तलवार लटकी है। इससे पहले 29 अक्टूबर 2025 को भी सरकार ने उन्हें हटाने की कोशिश की थी, जिसके खिलाफ निवासियों ने दिल्ली हाई कोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट ने 13 नवंबर 2025 को सरकार से जवाब तलब किया था और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि उचित कानूनी प्रक्रिया और पुनर्वास नीति का पालन किए बिना किसी को बेदखल नहीं किया जा सकता। इस साल 13 जनवरी को केंद्र ने अदालत से तैयारी के लिए चार हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा था। मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होनी तय है, लेकिन उससे पहले ही सरकार ने नया ‘इविक्शन नोटिस’ जारी कर दबाव बढ़ा दिया है।
प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा निस्संदेह सर्वोपरि है, लेकिन इसके साये में पल रहे सैकड़ों परिवारों का भविष्य अब अधर में है। क्या सरकार इन परिवारों को आसपास ही कहीं बसाने पर विचार करेगी या उन्हें दिल्ली की सीमाओं पर धकेल दिया जाएगा? फिलहाल, 6 मार्च की समयसीमा जैसे-जैसे करीब आ रही है, इन तीन कैंपों के निवासियों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। मानवीय आधार पर यह मांग उठ रही है कि विकास और सुरक्षा की कीमत इन गरीबों के रोजगार को छीनकर न चुकाई जाए।
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