PoK Protest Rebellion : पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आज दोपहर से शुरू हुए बंद और उग्र प्रदर्शनों के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। रावलकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली, भिंबर, ददयाल, पालंदरी और सुधनोति सहित कई प्रमुख इलाकों में हजारों लोगों का हुजूम सड़कों पर उतर आया है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं और अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं। रावलकोट में सुबह से ही मुख्य सड़कों को जाम कर दिया गया है। वहीं, भिंबर से रावलकोट की तरफ बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पाकिस्तानी पुलिस, सेना और रेंजर्स ने ताबड़तोड़ फायरिंग की, आंसू गैस के गोले दागे और पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जिसमें कम से कम सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

पूरे क्षेत्र में चक्काजाम और बाजारों में पसरा सन्नाटा
कोटली और ददयाल में भी कश्मीरी नागरिक भारी संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के बड़े-बड़े जत्थे रावलकोट की ओर कूच कर रहे हैं। इस बगावत का असर स्थानीय व्यापार पर भी साफ देखा जा रहा है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और कोटली समेत कई प्रमुख शहरों में बाजार पूरी तरह बंद हैं। पालंदरी में तो प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों द्वारा दागे गए आंसू गैस के गोलों को ही हाथों में उठाकर वापस फेंकते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। वहीं सुधनोति में लोग हाथों में लाठी-डंडे लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं और पाकिस्तानी सेना को सीधे तौर पर चेतावनी दे रहे हैं।

नीलम पुल पर हिंसक झड़पें और 38 सूत्रीय मांगें
मुजफ्फराबाद के ऐतिहासिक नीलम पुल पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधी हिंसक झड़पें शुरू हो गई हैं। इलाके से लगातार गोलीबारी की खबरें और तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया है। दरअसल, पीओके की अवाम अपनी कुल 38 मांगों को लेकर यह आंदोलन कर रही है। उनकी मुख्य मांगों में सस्ती बिजली, आटा, चावल और दाल जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। स्थानीय जनता का तर्क है कि पाकिस्तान ने मंगला डैम जैसे बड़े हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट उनकी जमीन पर लगाए हैं, इसलिए उन्हें बेहद कम दरों पर बिजली मिलनी चाहिए।
संसद की 12 शरणार्थी सीटों पर आईएसआई का कब्जा
पीओके के नागरिकों की एक बड़ी मांग अपनी संसद से 12 कथित शरणार्थी सीटों को पूरी तरह हटाने की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो भारत के कश्मीर से आए थे, लेकिन अब वे पीओके के बजाय पाकिस्तान के रावलपिंडी और कराची जैसे शहरों में रहते हैं। आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई (ISI) इन सीटों पर हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों और उनके परिवारों को चुनाव जितवाती है। इस तरह 45 में से 12 सीटों पर कब्जा करके पाकिस्तानी सेना जब चाहती है, जोड़-तोड़ कर पीओके में अपनी मर्जी का प्रधानमंत्री बना देती है।
‘लाहौर के कसाई’ ब्रिगेडियर फैक अयूब का आतंक
पिछले एक साल से पीओके में हक मांगने वाले आम नागरिकों पर सेना का दमन चक्र चल रहा है। इसका मुख्य कारण आईएसआई के सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर फैक अयूब को माना जा रहा है। इससे पहले जब वह पंजाब प्रांत में तैनात था, तब लाहौर में किए गए दमन के कारण उसे ‘लाहौर का कसाई’ नाम दिया गया था। पिछले साल पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने उसे पीओके की कमान सौंपी थी। आंकड़ों के अनुसार, इस दमनकारी नीति के चलते पिछले 8 महीनों में सेना की गोलियों से लगभग 57 आम नागरिकों की जान जा चुकी है, जिससे जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।
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