PoK Protest : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) इस समय भीषण तनाव और हिंसा की चपेट में है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर क्षेत्र के हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। स्थानीय खबरों के अनुसार, मुजफ्फराबाद, रावलकोट और सुधनोती जैसे इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखा संघर्ष चल रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और स्थानीय प्रशासन उनकी आवाज को कुचलने के लिए क्रूर हथकंडे अपना रहा है। रावलकोट और सुधनोती के बीच सुरक्षा बलों द्वारा की गई फायरिंग में कम से कम 8 लोगों की मौत की खबर है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है।

मुजफ्फराबाद कूच और सुरक्षा बलों का दमन
तनाव तब और बढ़ गया जब प्रदर्शनकारियों ने ‘मुजफ्फराबाद कूच’ का आह्वान किया। भारी संख्या में लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने रावलकोट बस स्टैंड के आसपास बल प्रयोग किया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और अंधाधुंध फायरिंग की गई। सुरक्षा बलों की यह हिंसक कार्रवाई जनता के आक्रोश को और अधिक भड़का रही है। क्षेत्र में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प कर दी गई है, जिससे इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद हैं।

12 आरक्षित सीटों पर गहराता विवाद
PoK के निवासियों का गुस्सा उस चुनावी व्यवस्था के खिलाफ है, जिसे वे अपनी स्वायत्तता के लिए खतरा मानते हैं। विधानसभा की कुल 53 सीटों में से 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो PoK में नहीं बल्कि पाकिस्तान के लाहौर, कराची और रावलपिंडी जैसे शहरों में रहते हैं। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस्लामाबाद इन सीटों के माध्यम से PoK में अपनी एक ‘कठपुतली सरकार’ थोपता है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस अन्यायपूर्ण चुनावी प्रणाली में तुरंत बदलाव किया जाए, ताकि वे अपने प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से चुन सकें।
36 दिनों का संघर्ष और दमन की दास्तान
यह आंदोलन कोई एक दिन का घटनाक्रम नहीं है, बल्कि पिछले 36 दिनों से जारी जन-आक्रोश की परिणति है। प्रदर्शनकारी सरकार की नीतियों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव, जैसे कि बिजली और आटे की कमी के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों का दावा है कि इस पूरे संघर्ष के दौरान अब तक 80 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों नेताओं व कार्यकर्ताओं को जेलों में ठूंस दिया गया है। 27 जुलाई को होने वाले चुनावों के साये में यह आंदोलन अब एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर PoK में जारी अत्याचार की निंदा
PoK में हो रही इस बर्बरता पर भारत ने भी कड़ा रुख अपनाया है। भारत सरकार ने वहां के लोगों पर हो रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की इन दमनकारी नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जनता का स्पष्ट मानना है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगों और चुनावी अधिकारों का सम्मान नहीं किया जाता, तब तक यह असंतोष थमने वाला नहीं है।
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