छत्तीसगढ़

पत्थलगांव को नगर पालिका बनाने की घोषणा पर मचा राजनीति बवाल, विधायक गोमती साय ने लगाया आरोप…

पत्थलगांव@thetarget365 : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा पत्थलगांव नगर पंचायत को नगर पालिका बनाए जाने की घोषणा के बाद अब इस फैसले पर राजनीति तेज हो गई है। नगर पालिका की अधिसूचना जारी होते ही पत्थलगांव के पूर्व विधायक रामपुकार सिंह और वर्तमान विधायक गोमती साय आमने-सामने आ गए हैं।

विधायक गोमती साय का आरोप

सरगुजा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और पत्थलगांव की वर्तमान विधायक गोमती साय का आरोप है कि कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक रामपुकार सिंह नगर पालिका के गठन में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल को लिखे गए एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि रामपुकार सिंह पत्थलगांव के विकास कार्यों को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। गोमती साय ने कहा, “नगर पालिका का गठन पत्थलगांव के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन पूर्व विधायक इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं। यह बहुत दुखद है कि इतने वरिष्ठ नेता होने के बावजूद वे इसका विरोध कर रहे हैं।”

रामपुकार सिंह का पलटवार

पूर्व विधायक रामपुकार सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि वे हमेशा से पत्थलगांव के विकास के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पत्र किसी अवरोध के लिए नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया को सही ढंग से लागू करने के लिए था। उन्होंने कहा, “अगर पत्थलगांव को नगर पालिका बनाया जाता है, तो मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी। यह क्षेत्र के भविष्य के विकास का आधार बनेगा।”

विधिक मापदंडों का सवाल

रामपुकार सिंह ने नगर पालिका के गठन को लेकर विधिक मापदंडों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार पत्थलगांव की जनसंख्या 16,613 है, जबकि नगर पालिका के गठन के लिए कम से कम 20,000 की जनसंख्या होनी चाहिए। इसके अलावा, नगर पालिका के लिए 16 से 40 वार्डों की आवश्यकता होती है, जबकि पत्थलगांव में अभी केवल 15 वार्ड हैं। उन्होंने कहा, “अगर नगर पालिका का गठन इन मानकों को पूरा किए बिना किया जाता है, तो यह विधि सम्मत नहीं होगा।”

विकास का मुद्दा या राजनीतिक विवाद?

राज्य शासन ने 5 सितंबर 2024 को अधिसूचना जारी कर 21 दिनों के भीतर आपत्ति या सुझाव देने का प्रावधान रखा था। रामपुकार सिंह ने कहा कि इस संबंध में समय पर जानकारी नहीं मिलने के कारण वे आपत्ति या सुझाव नहीं दे सके।

अब सवाल यह उठता है कि पत्थलगांव को नगर पालिका बनाए जाने का यह फैसला विकास के लिए उठाया गया कदम है या फिर यह एक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बन गया है? क्या नगर पालिका का गठन क्षेत्र की जनता के हितों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, या यह सिर्फ एक राजनीतिक बहस बनकर रह जाएगी?

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