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Ponzi scam : पोंजी स्कीम घोटाला: पूर्व TMC सांसद कंवर दीप सिंह के बेटे की 127 करोड़ की संपत्ति ED ने जब्त की

Ponzi scam :  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद और व्यवसायी कंवर दीप सिंह के बेटे करणदीप सिंह के स्वामित्व वाली कंपनी सोरस एग्रीटेक के 127.33 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों को जब्त कर लिया है। यह मामला 1,900 करोड़ रुपये की कथित पोंजी स्कीम धोखाधड़ी से जुड़ा है।

पोंजी स्कीम के जरिए निवेशकों से ठगे गए 1,848 करोड़ रुपये

यह कार्रवाई अल्केमिस्ट टाउनशिप, अल्केमिस्ट इंफ्रा रियल्टी और कंवर दीप सिंह सहित अल्केमिस्ट समूह के निदेशकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। आरोप है कि इन कंपनियों ने सामूहिक निवेश योजनाओं के जरिए निवेशकों को अधिक रिटर्न का झूठा वादा करके करीब 1,848 करोड़ रुपये अवैध रूप से इकट्ठा किए।

धोखाधड़ी के धन को छिपाने के लिए रची गई जटिल योजना

ED के अनुसार, इस घोटाले में जुटाए गए धन को जटिल वित्तीय लेनदेन के जरिए छिपाया गया। इस धन को अल्केमिस्ट समूह की विभिन्न कंपनियों के माध्यम से रूट किया गया, ताकि इसके स्रोत को वैध दिखाया जा सके। इसी धन का इस्तेमाल बाद में शेयरों की खरीद और अस्पतालों के निर्माण में किया गया।

शेयर खरीद से अस्पताल निर्माण तक मनी लॉन्ड्रिंग की परतें खुलीं

जांच एजेंसी ने खुलासा किया कि पंचकूला स्थित अल्केमिस्ट अस्पताल में 40.94 प्रतिशत और ओजस अस्पताल में 37.24 प्रतिशत हिस्सेदारी सोरस एग्रीटेक के पास है। यह कंपनी कंवर दीप सिंह के बेटे करणदीप सिंह की है। ED ने इन्हीं शेयरों को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया है।

2018 से चल रही है जांच, पहले भी हो चुकी है करोड़ों की संपत्ति जब्त

ED ने PMLA के तहत यह जांच वर्ष 2018 में शुरू की थी। कोलकाता पुलिस और CBI द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर अल्केमिस्ट समूह, उसके निदेशकों और मालिकों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप लगे थे। इससे पहले भी ED इस मामले में दो आरोपपत्र दाखिल कर चुका है और 238.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।

कंवर दीप सिंह दो बार रहे राज्यसभा सांसद, 2021 में हुई थी गिरफ्तारी

कंवर दीप सिंह दो बार तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उनका कार्यकाल 2020 में समाप्त हुआ था। इसके बाद 2021 में ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। जांच में सामने आया कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने ग्राहकों को झूठे निवेश वादों से फंसाकर करोड़ों रुपये की ठगी की और उसे रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और वित्तीय लेनदेन में खपाया।

यह मामला न केवल पोंजी स्कीम के जरिए जनता से ठगी का है, बल्कि इस धोखाधड़ी की कमाई को कानूनी रंग देने की सुनियोजित साजिश का भी उदाहरण है। ED की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कड़ी चेतावनी मानी जा रही है।

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