Palestine statehood 2025: इज़रायल-गाज़ा संघर्ष के बीच फिलिस्तीन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है। अब पुर्तगाल ने भी फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा देने की घोषणा कर दी है। इससे पहले फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम जैसे देशों ने इसी तरह की घोषणा की थी। पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइज मोंटेनेग्रो ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जो फिलिस्तीन को मान्यता देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पुर्तगाल के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “रविवार को हम औपचारिक रूप से फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देंगे।” सरकार ने यह फैसला राष्ट्रपति और संसद के सभी प्रमुख पक्षों से विमर्श के बाद लिया है।
गौरतलब है कि जुलाई में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इसी तरह का ऐलान किया था। वहीं फ्रांस और ब्रिटेन ने साफ कर दिया था कि अगर गाज़ा में युद्ध नहीं रुका, तो वे फिलिस्तीन को राज्य का दर्जा देंगे। हालांकि ब्रिटेन ने इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं—जैसे कि हमास को बंधकों की रिहाई, युद्धविराम की सहमति और हथियार छोड़ने की शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके अलावा, हमास को यह भी स्पष्ट करना होगा कि गाज़ा की शासन व्यवस्था में उसका कोई हिस्सा नहीं रहेगा।
इज़रायल द्वारा गाज़ा पर लगातार हमलों के कारण हालात अत्यंत भयावह हो गए हैं। पूरा क्षेत्र एक तबाह मलबे में तब्दील हो चुका है। गाज़ा को “नरक” में बदल दिया गया है, ऐसा आरोप अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों की ओर से लगाया जा रहा है।
इस बीच, एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट ने दावा किया है कि अमेरिका एक नया प्लान बना रहा है, जिसके तहत गाज़ा के लगभग 20 लाख लोगों को अस्थायी रूप से मिस्र, क़तर जैसे देशों में भेजा जाएगा। चार वर्षों तक गाज़ा को पुनर्निर्मित किया जाएगा और इस दौरान विस्थापित लोगों को डिजिटल टोकन, नकद सहायता और एक साल तक भोजन दिया जाएगा।
फिलिस्तीन को राष्ट्र का दर्जा देना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके अधिकारों को मान्यता देने का प्रतीक है। इससे उसे संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व का अधिकार मिल सकता है। यह कदम न केवल फिलिस्तीनियों के आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
पुर्तगाल की यह घोषणा वैश्विक कूटनीति में एक निर्णायक मोड़ हो सकती है। जैसे-जैसे और देश फिलिस्तीन को मान्यता देने के लिए आगे आ रहे हैं, इज़रायल-फिलिस्तीन संघर्ष का समाधान और अधिक दबाव के तहत आ सकता है।
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