Pralay Chaki Death
Pralay Chaki Death: बांग्लादेश इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। सड़कों पर डर का माहौल है और राजनीति सुलग रही है। इसी बीच, अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ के वरिष्ठ नेता और प्रसिद्ध हिंदू संगीतकार प्रलय चाकी की पुलिस हिरासत में मौत ने देश के अल्पसंख्यकों में भय और आक्रोश भर दिया है। 60 वर्षीय चाकी न केवल एक राजनेता थे, बल्कि पाबना जिले की सांस्कृतिक पहचान भी थे। प्रशासन इस घटना को बीमारी से जुड़ी सामान्य मौत बता रहा है, जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ता और परिवार इसे व्यवस्था की लापरवाही मान रहे हैं।
प्रलय चाकी 1990 के दशक से ही बांग्लादेश की सांस्कृतिक गतिविधियों का एक बड़ा चेहरा रहे हैं। वे अवामी लीग की पाबना जिला इकाई में सांस्कृतिक मामलों के सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनकी पहचान एक मृदुभाषी संगीतकार और निस्वार्थ सांस्कृतिक कार्यकर्ता के रूप में थी। ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें दिसंबर 2024 में उस हिंसक आंदोलन के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिसने शेख हसीना की सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया। उन पर एक विस्फोट से जुड़े मामले में संलिप्तता का आरोप लगाया गया था, जिसे उनके समर्थकों ने पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है।
पाबना जेल अधीक्षक एमडी ओमर फारूक ने मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रलय चाकी पहले से ही मधुमेह (डायबिटीज) और हृदय रोग से ग्रसित थे। जेल अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार को उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें तुरंत पाबना जनरल अस्पताल ले जाया गया। जब स्थिति और अधिक गंभीर हो गई, तो उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। रविवार रात करीब 9 बजे इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। प्रशासन का कहना है कि उन्होंने उपचार में कोई कोताही नहीं बरती और यह एक प्राकृतिक मृत्यु है।
प्रलय चाकी के बेटे, सोनी चाकी ने प्रशासन के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सोनी का आरोप है कि जेल प्रशासन ने उनके पिता की गिरती सेहत के बारे में परिवार को समय रहते सूचित नहीं किया। उन्हें दूसरों के माध्यम से पता चला कि उनके पिता अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार का कहना है कि जेल की कठोर परिस्थितियों और उचित चिकित्सा देखभाल के अभाव में उनकी हालत बिगड़ी। सोनी चाकी ने यह भी दावा किया कि गिरफ्तारी के समय उनके पिता का नाम किसी भी एफआईआर (FIR) में नहीं था, और उन्हें केवल राजनीतिक बदले की भावना से निशाना बनाया गया।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। प्रलय चाकी की मौत ने उन लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है जो वर्तमान सत्ता या कट्टरपंथी गुटों के वैचारिक विरोधी हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी बांग्लादेश में मानवाधिकारों के उल्लंघन और जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।
बांग्लादेश में वर्तमान स्थिति केवल राजनीतिक गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। उग्र भीड़ ने देश की सांस्कृतिक विरासत और प्रेस की स्वतंत्रता पर भी हमला बोला है। शेख मुजीबुर रहमान के संग्रहालय, उदीची शिल्पगोष्ठी जैसे सांस्कृतिक केंद्रों और कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के दफ्तरों को निशाना बनाया गया है। यहाँ तक कि भारतीय राजनयिक मिशनों पर भी हमले की खबरें आई हैं। प्रलय चाकी जैसे कलाकार और नेता की हिरासत में मौत इस बात का संकेत है कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति कितनी संवेदनशील हो चुकी है।
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