Prashant Kishor FIR : बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को जनसुराज पार्टी द्वारा आयोजित विधानसभा मार्च के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जनसुराज के संयोजक और चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर समेत 9 नामजद और 2000 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ सचिवालय थाना में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति के विधानसभा की ओर मार्च निकाला और कानून-व्यवस्था भंग करने की कोशिश की।
पटना सेंट्रल एसपी दक्षा कुमारी ने बताया कि जनसुराज कार्यकर्ताओं ने पुलिस की अनुमति के बिना विधानसभा की ओर मार्च किया, जो एक निषेधाज्ञा (धारा 144) का उल्लंघन था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में जबरन प्रवेश किया और सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की भी की। एसपी ने कहा कि यह राजधानी की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गई थी, जिस कारण IPC की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
दर्ज एफआईआर में सरकारी कार्य में बाधा डालना, सरकारी आदेश की अवहेलना, भीड़ इकठ्ठा कर उपद्रव फैलाना, और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संगठन को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती और यदि नियम तोड़े जाते हैं, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बुधवार को जनसुराज कार्यकर्ता पटना के डाकबंगला चौराहे से मार्च निकालते हुए विधानसभा की ओर बढ़े। जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो झड़प हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, जिससे कई कार्यकर्ता घायल हुए। प्रदर्शन के दौरान प्रशांत किशोर को हिरासत में लिया गया, जिन्हें कुछ घंटों बाद छोड़ दिया गया।
जनसुराज पार्टी के इस प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार से तीन मांगों को लेकर जवाब मांगना था:
94 लाख गरीब परिवारों को 2 लाख की सहायता – जातीय जनगणना 2023 में चिन्हित इन परिवारों को अभी तक आर्थिक मदद नहीं मिली है।
50 लाख दलित और अति पिछड़ा परिवारों को 3 डिसमिल जमीन – जमीन देने का वादा अधूरा है।
जमीन सर्वे के नाम पर भ्रष्टाचार पर कार्रवाई – वंशावली, दाखिल-खारिज और रसीद के नाम पर चल रही लूट पर लगाम लगाने की मांग।
प्रशांत किशोर ने सरकार पर इन मुद्दों पर मौन रहने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक जनता को जवाब नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जनसुराज पार्टी ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है, जबकि प्रशासन ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी बताया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का रास्ता चुना था, लेकिन सरकार इसे दबाने की कोशिश कर रही है।
प्रशांत किशोर की पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर सरकार इन मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। पार्टी राज्य के हर जिले में जनसभा और पदयात्रा के जरिए मुद्दों को उठाने की योजना बना रही है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रशांत किशोर ने कहा, “हम डरने वाले नहीं हैं। यह लड़ाई सिर्फ मेरे बेटे या बेटी की नहीं है, यह बिहार के 94 लाख परिवारों की है। सरकार जवाब दे, वरना जनता खुद जवाब लेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी कार्रवाई से जनसुराज का आंदोलन नहीं रुकेगा।
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