Saturday Classes : छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक सत्र के एक माह बाद एकेडमिक कैलेंडर जारी कर दिया है, जिसमें स्कूलों के संचालन को लेकर अहम बदलाव किए गए हैं। अब हर शनिवार हाफ डे नहीं होगा, बल्कि अन्य कार्यदिवसों की तरह स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक खुलेंगे। यह नियम सभी सिंगल शिफ्ट स्कूलों पर लागू होगा। अब शनिवार भी पढ़ाई का पूरा दिन होगा।
नए कैलेंडर के अनुसार, हर शनिवार बैगलेस नहीं होगा, बल्कि माह के दूसरे और चौथे शनिवार को ‘बैगलेस डे’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इस दिन बच्चों को किताबें लाने की आवश्यकता नहीं होगी और पढ़ाई को रचनात्मक गतिविधियों, खेल, प्रयोगात्मक शिक्षा और अन्य नवाचारों से जोड़ा जाएगा। इससे छात्रों में स्कूल के प्रति रुचि और भागीदारी बढ़ने की संभावना है।
हालांकि यह बदलाव सिर्फ एकल पालियों (single shift) वाले स्कूलों के लिए है। दोहरी पालियों (double shift) में संचालित स्कूलों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। वे पहले की तरह अपनी निर्धारित समय-सारणी के अनुसार चलते रहेंगे।
इस नए दिशा-निर्देश के चलते स्कूलों में असंतुलन और भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न हो रही है क्योंकि सत्र के प्रारंभ से अब तक अधिकांश स्कूल पुराने शेड्यूल के अनुसार संचालित हो रहे थे। अब शिक्षकों और प्रबंधन को नए कैलेंडर के अनुसार परिवर्तन करना होगा, जिसके लिए स्पष्ट मार्गदर्शन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
नई कक्षा पहली में प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए ‘रेडीनेस कार्यक्रम’ को सितंबर तक जारी रखा जाएगा। इसका उद्देश्य छोटे बच्चों को स्कूल की आदत डालना, उनके मन में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना और उन्हें कक्षा के माहौल के लिए मानसिक रूप से तैयार करना है। शिक्षकों को इस कार्यक्रम के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।
नए एकेडमिक कैलेंडर में यह भी निर्देश दिया गया है कि प्रार्थना सभा के दौरान छात्रों को हर माह एक विशेष विषय पर जानकारी दी जाएगी। उदाहरण के लिए – जुलाई महीने में पर्यावरण जागरूकता, और अगस्त में सुरक्षा से जुड़ी जानकारी छात्रों को दी जाएगी। यह सत्र शिक्षकों द्वारा संचालित होंगे।
‘सुरक्षा विषय’ के अंतर्गत छात्रों को बाल सुरक्षा अधिकार, हेल्पलाइन नंबरों, चोट लगने पर प्राथमिक उपचार, आग लगने की स्थिति में उपाय, स्कूल में जलभराव से निपटना, सांप या बिच्छू के डंक से बचाव, साइबर सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, और यातायात नियमों की जानकारी दी जाएगी। इससे छात्रों में आपात स्थितियों से निपटने की समझ विकसित होगी।
नए सत्र में छात्रों की निरंतर मूल्यांकन (Continuous Assessment) की जिम्मेदारी भी शिक्षकों को दी गई है। यानी छात्रों का मूल्यांकन अब परीक्षा भर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी दैनिक गतिविधियों, सीखने की गति और समझ के आधार पर किया जाएगा। यह मॉडल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बताया गया है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, यह नया कैलेंडर बच्चों को रचनात्मकता, सहयोग, और संवाद के लिए प्रेरित करेगा। बैगलेस डे के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई से इतर गतिविधियों में शामिल किया जाएगा, जिससे उनके सामाजिक और व्यवहारिक कौशल भी विकसित हो सकेंगे।
यह नया शैक्षणिक ढांचा न सिर्फ पढ़ाई के पैटर्न को बदल रहा है, बल्कि छात्रों के अनुभवों को समृद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि शुरुआती दिनों में इसके क्रियान्वयन को लेकर कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन लंबे समय में इसका प्रभाव सकारात्मक रहने की उम्मीद है।
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